लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
आदित्यपुर स्थित आशियाना आदित्य सोसाइटी में चार दिवसीय नवरात्र महोत्सव भक्तिमय माहौल और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। विजयादशमी के पावन अवसर पर आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित किया। पूजा-अर्चना, आरती और पारंपरिक सिंदूर खेला के साथ उत्सव ने सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी मिसाल पेश की।
आशियाना आदित्य सोसाइटी में चार दिवसीय नवरात्र महोत्सव की भव्य झलक
औद्योगिक नगरी आदित्यपुर के हृदय स्थल में स्थित आशियाना आदित्य सोसाइटी का प्रांगण चार दिनों तक देवी आराधना की अलौकिक छटा से सराबोर रहा। आयोजन समिति द्वारा भव्य पंडाल का निर्माण किया गया था, जिसकी आकर्षक विद्युत सज्जा देखते ही बनती थी। रात्रि में रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया पंडाल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। बंगाल से पधारे विद्वान पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा संपन्न कराई, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा।
चारों दिन भजन संध्या, माता की चौकी, महाभोग और रात्रि भोज का आयोजन किया गया। महाभोग प्रसाद वितरण में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, वहीं रात्रि भोज ने सामुदायिक भोज की परंपरा को जीवंत रखा। इस दौरान सोसाइटी के निवासियों ने बढ़-चढ़कर सेवा कार्य में भाग लिया, जिससे आयोजन की भव्यता में चार चांद लग गए।
सिंदूर खेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
विजयादशमी के दिन उत्सव अपने चरम पर पहुंचा जब सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला में उत्साहपूर्वक भाग लिया। लाल साड़ियों में सजी महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की कामना की। यह दृश्य बेहद भावुक और मनमोहक था, जिसने उपस्थित हर किसी का मन मोह लिया। सिंदूर खेला की यह परंपरा बंगाली संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे यहां पूरी निष्ठा के साथ निभाया गया।
सांस्कृतिक संध्या में महिलाओं ने गरबा और डांडिया की शानदार प्रस्तुति देकर गुजरात की लोक संस्कृति की झलक दिखाई। ढोल की थाप और पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बनता था। वहीं, बच्चों ने धार्मिक एवं देशभक्ति विषयों पर आधारित झांकियां प्रस्तुत कीं। विशेष रूप से वीरांगना झांसी की रानी के शौर्य का जीवंत प्रदर्शन कर नन्हे कलाकारों ने दर्शकों में देशभक्ति का जज्बा भर दिया। इस प्रस्तुति को भरपूर सराहना मिली।
आयोजन समिति और वरिष्ठ नागरिकों का अमूल्य योगदान
इस महोत्सव को सफल बनाने में पूजा समिति के अध्यक्ष शंकर गुरुनाथन, सोसाइटी अध्यक्ष मेजर सत्यनारायण, अमिता चौधरी, कुन्दन कुमार, राजीव नंदन, पी.के. सिंह, मधुलिका, निकिता पेड़ीवाल, पुष्कर चौधरी, प्रदीप जोशी, अरुण कुमार सिंह, डी. खंडेलवाल, श्रीराम गुरुनाथन, ललन कुमार सिंह, सुरेश चौधरी, संदीप भौमिक, एस.एन. प्रसाद, अंशुमन सरकार, दीपेन सरकार, डॉ. सिकंदर, दीपक बिस्वास, मनीष चौधरी, धर्मेंद्र शर्मा और प्रीति खंडेलवाल की प्रमुख भूमिका रही। इनके अथक परिश्रम और समन्वय ने आयोजन को सुव्यवस्थित बनाया।
वरिष्ठ नागरिकों में ऊषा सत्यनारायण, चंद्रा शंकर, विभा चौधरी, इंदु देवी, उर्मिला देवी, सबिता झा, एस.के. पहाड़ी, देवेंद्र सिंह, उपेंद्र शर्मा और अनंत झा सहित सोसाइटी के सभी निवासियों ने तन-मन-धन से सहयोग किया। बुजुर्गों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना। समापन समारोह में मेजर सत्यनारायण और शंकर गुरुनाथन ने सभी सहयोगियों, पुरोहितों, कलाकारों एवं निवासियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा आयोजन सामाजिक एकता को मजबूत करता है। नवरात्रि का महत्व इसी सामाजिक समरसता में निहित है।
सामाजिक एकता का प्रतीक बना उत्सव
यह नवरात्र महोत्सव मात्र धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर एक वृहद सामाजिक समागम बन गया। विभिन्न प्रांतों की संस्कृतियों का संगम यहां देखने को मिला। बंगाल की पूजा पद्धति, गुजरात का गरबा-डांडिया और झारखंड की माटी की सुगंध ने एक ऐसा वातावरण रचा जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ करता है। सोसाइटी के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सहभागिता ने इस उत्सव को पारिवारिक स्वरूप प्रदान किया।
आयोजन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि शहरी जीवन की आपाधापी के बीच भी परंपराओं को जीवंत रखा जा सकता है। आशियाना आदित्य सोसाइटी ने एक मानक स्थापित किया है कि कैसे सामूहिक प्रयास से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और समृद्ध किया जा सकता है। भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा निवासियों द्वारा की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

