रामनवमी पर मुस्लिम कारीगर की भक्ति: जमशेदपुर के मुमताज भाई 18 वर्षों से बना रहे महावीरी झंडा, दूर-दूर से आते हैं खरीददार
देश में इन दिनों वक्फ बिल संशोधन 2025 पर संग्राम छिड़ा हुआ है. सड़क से लेकर सदन तक सियासत तेज है. कोई इस बिल की सराहना कर रहा है तो कोई विरोध कर रहा है. मगर अपने देश में गंगा- जमुनी तहजीब की परंपरा रही है इसके अनेकों उदाहरण देखने- सुनने को मिलते हैं. ऐसा ही एक उदाहरण लौहनगरी जमशेदपुर में देखने को मिलता है. जहां रामनवमी पर मुमताज भाई के हाथों का बना महावीरी झंडा खरीदने दूर- दराज से लोग पहुंते हैं. मुमताज बताते हैं कि पिछले 18 वर्षों से वे रामनवमी के मौके पर महावीरी झंडे का निर्माण करते हैं इसे खरीदने दूर- दूर से रामभक्त आते हैं. इससे पूर्व उनके मरहूम वालिद यानी दिवंगत पिता महावीरी झंडे बनाते थे. यह कला उन्ही से विरासत में मिली है. जिसका निर्वहन कर रहे हैं. कमाई मायने नहीं रखता है परंपरा मायने रखता है. आपको बता दें कि जमशेदपुर के साकची मार्केट में मुमताज आलम की छोटे सी टेलर की दुकान है. वैसे तो मुमताज भाई सालोभर आम दर्जी की तरह कपड़ों की सिलाई करते हैं मगर रामनवमी के मौके पर मुमताज भाई रामभक्ति में लीन हो जाते हैं. वक्फ बिल को लेकर सियासी संग्राम में उलझने वालों के लिए मुमताज भाई एक मिसाल हो सकते हैं.