सुंदरनगर थाना के पुराने मामले में बड़ा मोड़, यूसीआईएल कर्मी के आरोपों पर उठे गंभीर सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। सुंदरनगर थाना से जुड़े एक पुराने मामले में अब चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। यूसीआईएल में कार्यरत नवीन भारती द्वारा लगाए गए आरोपों ने न सिर्फ तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर मानिक चंद्र बेहेरा को विवादों में घेरा, बल्कि कुछ वरीय पुलिस पदाधिकारियों और पत्रकारों को भी लंबे समय तक असमंजस की स्थिति में रखा।


मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, नवीन भारती ने कुंभ मेला जाने के लिए जीत ट्रैवल एजेंसी से एक गाड़ी बुक की थी। आरोप है कि महाकुंभ अयोध्या–काशी–प्रयागराज–बनारस यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने गाड़ी का किराया नहीं चुकाया। बार-बार किराया मांगने पर एजेंसी के मालिक रवि कुमार से टालमटोल किया गया और अंततः उनका मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया गया।
परेशान होकर एजेंसी मालिक के भाई विक्की कुमार ने नवीन भारती से बातचीत कर मामले का समाधान निकालने का प्रयास किया। इसी क्रम में बाइक से जाते समय उन्हें बैठाकर सुंदरनगर थाना लाया गया, जिसकी पुष्टि थाना परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज से होती है। थाने में सुलह-समझौते के दौरान नवीन भारती ने स्वयं बकाया राशि स्वीकार की और अपने मित्र सागर डे के साथ आईसीआईसीआई बैंक ATM जाकर पैसा निकालकर ट्रैवल एजेंसी को भुगतान भी किया।
इसके बावजूद बाद में नवीन भारती ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें थाने में लाकर मारपीट की गई, उनकी गाड़ी छीन ली गई और मारपीट के दौरान उनका हाथ टूट गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर तत्कालीन एसआई मानिक चंद्र बेहेरा को निलंबित कर दिया गया।
अब सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों ने इन आरोपों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य प्रमाणों के अनुसार न तो थाने में किसी तरह की मारपीट हुई और न ही गाड़ी छीने जाने की पुष्टि होती है। उल्टा, यह भी सामने आया है कि नवीन भारती स्वयं गाड़ी में बैठकर थाने पहुंचे थे और एटीएम में दोनों हाथों से पैसे गिनते हुए दिखाई दे रहे हैं।
चिकित्सकीय दस्तावेज भी संदेह पैदा करते हैं। एक दिन अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बाएं हाथ में चोट की बात कही गई, जबकि अगले ही दिन दाहिने हाथ में प्लास्टर दिखाई दिया। इससे कथित मारपीट और चोट के दावों पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
बताया जा रहा है कि नवीन भारती द्वारा पहले भी कई लोगों के खिलाफ दर्जनों मुकदमे दर्ज कराए गए हैं और उनकी केस-हिस्ट्री काफी लंबी है। अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या कथित झूठे आरोपों के आधार पर की गई कार्रवाई की अब समीक्षा होगी और क्या वर्षों से मानसिक व पेशेवर पीड़ा झेल रहे तत्कालीन एसआई मानिक चंद्र बैरा को न्याय मिल पाएगा। सूत्रों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।


