Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » श्रीलंका की मदद के लिए भारत को आगे आना चाहिये : के एन त्रिपाठी
    Breaking News Headlines जमशेदपुर जामताड़ा झारखंड रांची राजनीति

    श्रीलंका की मदद के लिए भारत को आगे आना चाहिये : के एन त्रिपाठी

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 29, 2022No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    श्रीलंका की मदद के लिए भारत को आगे आना चाहिये : के एन त्रिपाठी

    श्रीलंका के लोग मदद के लिए आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं भारत की ओर भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर

    भारत सरकार को श्रीलंका सहित पड़ोसी देशों की मदद के लिए अखंड भारत कॉंसिल का गठन करना चाहिये

    मेदिनीनगर, 29 जुलाई
    श्रीलंका में उत्पन्न अराजक स्थिति के मद्देनजर मगध फाउंडेशन की कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई। बैठक को सम्बोधित करते हुए झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मगध फाउण्डेशन के संस्थापक अध्यक्ष केएन त्रिपाठी ने कहा कि भारत और श्रीलंका का ऐतिहासिक और पौराणिक संबंध रहा है। श्रीलंका की स्थापना भगवान शिव ने किया था।

    भगवान शिव की आज्ञा से विश्वकर्मा जी ने वहां माँ पार्वती जी के रहने के लिए एक सोने का महल बनवाया था जिसे बाद में महर्षि विश्रवा ने भगवान शिव से दान ले लिया था। रामायण काल से लेकर मौर्य काल तक श्रीलंका भारत का अभिन्न अंग रहा है। महान सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए श्रीलंका भेजा था। तब से लेकर आज तक श्रीलंका में हिंदू एवं बौद्ध धर्म की एक साझा संस्कृति रही है।

    लेकिन दुर्भाग्य से गलत आर्थिक नीतियों एवं नेतृत्व की अदूरदर्शिता से श्रीलंका आज एक कठिन स्थिति में फंस गया है। चीन ने श्रीलंका को इस प्रकार से अपने चंगुल में फंसा लिया है कि वह दिवालिया होेने के कगार पर है। अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है। विदेश मुद्रा भंडार खाली है। महंगाई चरम पर है।

    आवश्यक वस्तुओं की किल्लत है। जनता त्राहिमाम कर रही है। चीनी कर्ज का मर्ज लगातार बढऩे पर है। ड्रैगन उस पर अपना शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। कोलंबो को इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। श्रीलंका जिस हालात से दो-चार है, उसका सबसे बड़ा जिम्मेदार वह स्वयं है। एक तो चीन पर हद से ज्यादा निर्भरता बढ़ाकर उसने अपने लिए आफत मोल ले ली। दूसरे हाल के दौर में कुछ ऐसी घरेलू नीतियां अपनाईं जो उसके लिए आत्मघाती साबित हुईं। रही-सही कसर कोविड महामारी से उपजी आपदा ने पूरी कर दी। यही कारण है कि एक समय दक्षिण एशिया में मानव विकास सहित तमाम मानकों पर अग्रिम स्थिति पर दिखने वाला देश आज दिवालिया होने के कगार पर है।

    ऐसी स्थितियों में वह भारत जैसे पड़ोसी देश से मदद की आस लगाए हुए है। भारत के लिए भी यह श्रीलंका में गंवाई अपनी जमीन को वापस पाने का ऐतिहासिक अवसर प्रतीत हो रहा है। भारत को आगे बढ़कर श्रीलंका की मदद करनी चाहिये। प्रधानमंत्री को श्रीलंका की रक्षा और विदेश नीति को संभालने के साथ ही वहां के लोगों के मदद के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिये।

    श्री त्रिपाठी ने कहा कि भारत सरकार को अखंड भारत कॉंसिल की स्थापना कर अपने पड़ोसी देशों – पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, बर्मा,अफगानिस्तान एवं श्रीलंका को इसका सदस्य बनाना चाहिये। और सदस्य देशों को रक्षा और विदेश भारत सरकार देखे यह कॉंसिल सदस्य देशों की विदेश नीति और रक्षा मामलों का दायित्व उठायेगा। अभी तत्काल श्रीलंका को इसकी जरूरत है, अत: शुरुआत श्रीलंका से ही करना चाहिये। प्रधानमंत्री को आगे बढ़कर इसकी पहल करनी चाहिये। त्रिपाठी जी ने कहा कि मगध फाउंडेशन का एक प्रतिनिधिमंडल अति शीघ्र भारत सरकार और प्रधानमंत्री से मिलकर इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत करेगा। इससे विश्व में भारत की छवि सुदृढ़ होगी और मौर्यकालीन अखंड भारत का सपना भी साकार होगा।

    कार्यकारिणी बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से उनके इस प्रस्ताव का समर्थन एवं स्वागत किया। बैठक में मुख्य रूप से सी एस दुबे, के डी सिंह, राजेश रंजन, रिफातुल्लाह खान, डॉ अजय ओझा, डॉ साकेत शुक्ला, पाण्डेय प्रदीप शर्मा, बबन पासवान, सुशील चौबे आदि उपस्थित थे।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleएनीमिया मुक्त भारत का संदेश देने के उद्देश्य से निकाली गई जागरूकता रैली
    Next Article जानें कोल्हान की सुर्खियां

    Related Posts

    AI तकनीक से श्रावणी मेला प्रबंधन हुआ हाईटेक, रियल टाइम मॉनिटरिंग से श्रद्धालुओं को राहत

    August 8, 2026

    स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों का उपायुक्त ने लिया जायजा

    August 8, 2026

    12वां राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

    August 7, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    AI तकनीक से श्रावणी मेला प्रबंधन हुआ हाईटेक, रियल टाइम मॉनिटरिंग से श्रद्धालुओं को राहत

    स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों का उपायुक्त ने लिया जायजा

    12वां राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

    देहरादून में ‘सौहार्द’ और ‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी का आयोजन

    ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यक्रम में युवाओं से नशामुक्त समाज बनाने का आह्वान

    आफताब आलम हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता, दो शूटर समेत चार गिरफ्तार

    लगातार पांचवीं बार नवल टाटा हॉकी झारखंड सब-जूनियर एवं जूनियर स्टेट चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा एनटीएचए

    रेंगकर जलमीनार से लाती है पानी, बैटरी व्हीलचेयर के सहारे सपनों को उड़ान देना चाहती है मालती सिंह

    युवा शक्ति ही झारखंड के भविष्य की दिशा तय करेगी : सुदेश कुमार महतो

    नशे के अड्डों पर पुलिस का शिकंजा, सीनी में कई जगह छापेमारी

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.