Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » छत्तीसगढ़: शाम होने के पहले ही जेल में बंद हो जाते हैं ग्रामीण, जानिये क्या है इसकी वजह
    Breaking News Headlines

    छत्तीसगढ़: शाम होने के पहले ही जेल में बंद हो जाते हैं ग्रामीण, जानिये क्या है इसकी वजह

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 17, 2021No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    कांकेर. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में हाथियों से जान बचाने के लिए ग्रामीणों को जेल में बंद करना पड़ रहा है. दंडकारण्य के घनघोर जंगल मे मौजूद कांकेर के भानुप्रतापपुर के कई गांवों के सैकड़ों आदिवासियों को रात होते ही इलाके में मौजूद निर्माणाधीन जेल में हाथियों से जान बचाने के लिए छिपना पड़ रहा है. 20 से ज्यादा की संख्या में हाथी यहां दिन में जंगल मे पहाडिय़ों पर सो जाते है और फिर रात में गांवो में घूमकर जमकर उत्पात मचाते है.

    पिछले 1 महीने के भीतर हाथियों ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद और जशपुर में 3 लोगों को कुचलकर मार डाला है, जिसके डर के चलते हुए रोज शाम होते ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जेल में शरण लेने आ जाते है. यहां जेल में बंद होकर कैदियों की तरह रात बिताते हैं और उसके बाद सुबह होते ही घरो को लौट जाते है.
    ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के आतंक के चलते हमे जेल में कैदियों की तरह रहना पड़ रहा है. इससे पहले ऐसा कभी नहीं देखे. डर लगता है. 2-3 बजे के बाद ही जेल के लिए आना पड़ता है. ग्रामीणों और हाथियों के बीच द्वंद को लेकर सरकार का कहना है कि सरकार ग्रामीणों की सुरक्षा के कटिबद्ध है. ये हाथियों के भ्रमण का इलाका है, पिछले साल भी हाथी यहां आए थे और यही से वापिस लौट गए थे.

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि हाथी रायगढ़ कोरबा होते हुए बारनवापारा के जंगल से नीचे होते हुए यहां तक पहुंचे थे. अभी कांकेर में है और पिछले साल भी यहां तक आए थे. यहीं से वो वापस लौट जाते हैं. छत्तीसगढ़ में हाथी और मानव द्वंद की कहानी काफी पुरानी है.

    यहां पिछले 5 वर्षों में 350 से ज्यादा लोगों की मौत मानव हाथी द्वंद में हुई है. वहीं 25 से ज्यादा भी इसमें मारे गए. छत्तीसगढ़ में मानव और हाथी द्वंद रोकने के 2000 वर्ग किमी में हाथियों के लिए लेमरू रिजर्व एलीफैंट फ्रंट भी प्रस्तवित है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस योजना में सिर्फ भ्रष्टाचार कर रही है.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleभूस्खलन के कारण बंद हुआ चीन और नेपाल को जोड़ने वाला एनएच-125, लगी वाहनों की लंबी कतार
    Next Article संसद की लोक लेखा समिति की बैठक में हंगामा: अधीर रंजन चौधरी का प्रस्ताव नहीं हो सका पारित

    Related Posts

    ट्रेन में हथियार लहराकर यात्रियों को धमकाने वाला युवक गिरफ्तार

    June 28, 2026

    बैंगलुरू में आयोजित इंटक के कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शशि भूषण प्रसाद एवं महामंत्री आरके सिंह। 

    June 28, 2026

    चांडिल में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त, दो युवक घायल

    June 28, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    ट्रेन में हथियार लहराकर यात्रियों को धमकाने वाला युवक गिरफ्तार

    बैंगलुरू में आयोजित इंटक के कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शशि भूषण प्रसाद एवं महामंत्री आरके सिंह। 

    चांडिल में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त, दो युवक घायल

    जमशेदपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने धूमधाम से मनाया हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव

    चतरा में शादी की खुशियां मातम में बदली, डीजे वाहन पलटने से एक की मौत, तीन गंभीर घायल

    दिनदहाड़े महिला से सोने की चेन झपटकर फरार बदमाश

    शराब के नशे में चाचा बना हैवान, बहू और 10 वर्षीय भतीजी की कुल्हाड़ी से हत्या

    जमशेदपुर: डबल डाउन बार के बाहर चाकूबाजी का CCTV आया सामने, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

    चाईबासा के टेकराहातू गांव में ग्रामीणों संग नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सुनी पीएम मोदी की ‘मन की बात’

    दवा पर भरोसा टूटा तो इलाज का आधार भी डगमगाएगा

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.