नौकर चाकरों से भरे तीन एकड़ में फैले बंगला में सजा काट रहे लालू
जय प्रकाश राय
जब बिहार में लालू यादव की तूती बोलती थी तो न खाता न बही जो लालू कहें वही सही वाली कहावत चरिताार्थ होती रहती थी। लालू यादव चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे हैं लेकिन ऐसी सजा किसी किसी को नसीब होती है। कोरोना के नाम पर उनको रिम्स के 14 गुणा 14 के कमरे से निकालकर रिम्स निदेशक के बंगला में शिफ्ट कर दिया गया है।
लालू इकलौते ऐसे मरीज हैं जिन्होंने रिम्स के पेइंग वार्ड में रहने के दौरान हर दिन 1,000 रुपये के हिसाब से दो साल में करीब सात लाख रुपये का भुगतान किया है। होटवार जेल से लालू को साल 2018 में इलाज के लिए रिम्स में शिफ्ट किया गया था।उ्रन दिनों झारखंड में भाजपा की रघुवर सरकार थी। लेकिन अब नजारा बदल गया है। लालू के रिम्स के पेइंग वार्ड में रहने की कीमत सात लाख रुपये बतौर भाड़ा चुकाई थी।लेकिन अब कोरोना का हवाला देकर लालू प्रसाद को मुफ्त में तीन एकड़ का बंगला दे दिया गया। बंगले में चार बड़े-बड़े कमरे, तीन वाशरूम, दो बड़े डाइनिंग हॉल, एक ड्रॉइंग रूम, एक बड़ा बरामदा, गैरेज और एक सर्वेंट क्वार्टर है। इसके अतिरिक्त एक बड़ा सा लॉन है जिसमें कई तरह के पेड़-पौधे लगे हैं। बंगले में चार सेवादारों को लगाया गया है, जिसका भुगतान भी रिम्स प्रबंधन ही कर रहा है। ऐसी सुविधा क्या सामान्य कैदी को नसीब होती है, यह बताने की जरुरत नहीं।
कोरोना संक्रमण के बीच बिहार चुनाव की सुगबुगाहट के ने रांची के बरियातू स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) के डायरेक्टर बंगला को राजनीति का केंद्र बना दिया है। चारा घोटाला मामले के सजायाप्ता लालू यादव को यहां रखा गया है। उनको कोरोना मरीजों के बचाने के नाम पर यह विशेष सुविधा प्रदान की गयी है लेकिन अभी जो कुछ हो रहा है, वह इस सुविधा की धज्जियां उड़ाने वाला प्रतीत होता है। बिहार चुनाव के लिये टिकट की आस में रोजाना काफी संख्या में लोग लालू यादव से मिलने आ रहे हैं। राजनीतिक होने का यही लाभ होता है। अदालत द्वारा दोषी ठहराये जाने के बाद भी लालू यादव को वे सारी सुविधायें मिली हुई हैं जो सामान्य तौर पर सत्ताधारी बड़े राजनेता को मिलती है। रघुवर सरकार के दौरान लालू यादव के साथ जैसा व्यवहार किया गया था, अभी उसके ठीक उलट हो रहा है। बिहार में चुनावी सुगबुगाहट केबीच लालू के पास मत्था टेकने वालों की कतार लगी हुई है और यह रांची जिला प्रशासन और जेल प्रशासन के लिये परेशानी की सबब हो गयी है। उन्नाव के भाजपा सांसद साक्षी महाराज को जिला प्रशासन ने जिस तरह पकड़कर 14 दिनों के क्वोरेंटीन में डाल दिया था, उसके बाद लालू से मिलने आने वाले नेताओं को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। भारतीय जनता पार्टी इसे लेकर हमलावर हो गयी है और यही कारण है कि बाराचट्टी की राजद विधायक समता देवी को रांची में 14 दिनों के क्वोरेंटीन में रख दिया गया। हलांकि उन्होंने इसके लिये दलित कार्ड खेलने की कोशिश की और कहा कि वे चूंकि दलित हैं, इसलिये उनके साथ ऐसा किया जा रहा है। इसके बाद भी बिहार से लालू यादव के सामने माथा टेकने वालों के आने का सिलसिला लगातार जारी है।
ये सारे लोग अपना बायोडाटा लालू के सुपुर्द कर रहे हैं। यह कैसी विडंबना है कि एक सजायाप्ता पूरी तरह से अपनी राजनीति जेल से ही चला रहा है। लालू यादव को जिस कोरोना से बचाने के नाम पर इस बंगला में रखा गया है, वहां बाहर से आने वाले लोगों से उनको नियमित मिलना कितना सही है, यह बताने की जरुरत नहीं।
लालू से मिलने के लिए आने वालों की भीड़ और विपक्षी पार्टियों के विरोध के साथ-साथ झारखंड हाइकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गयी है, जिसमें लालू प्रसाद यादव को फिर से जेल भेजने की अपील की गयी है. इसके बाद जेल प्रशासन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर लालू प्रसाद की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा था. उसके बाद लालू की सुरक्षा में तीन दंडाधिकारियों की नियुक्ति कर दी गयी है।हलांकि इसके बाद लोगों का मिलना कुछ कम हुआ है, लेकिन यह कबतक चलता है, देखना होगा।
लेखक हिंदी दैनिक चमकता आईना के संपादक हैं

