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    Home » साहित्यिक संस्था “नव पल्लव” के दो साल पूरे मना रही है दूसरी वर्षगांठ
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    साहित्यिक संस्था “नव पल्लव” के दो साल पूरे मना रही है दूसरी वर्षगांठ

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 8, 2020No Comments8 Mins Read
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    माधुरी मिश्र , अध्यक्ष साहित्यिक संस्था “नव पल्लव”
    “नव पल्लव” के दो साल पूरे हो गये हैं। वह अपनी दूसरी वर्षगाँठ मना रहा है। चूँकि भारत लॉक डाउन है। आवागमन सम्भव नहीं है तो हमने वॉट्सएप्प के माध्यम से शहर के गणमान्य बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के विचार को नव पल्लव के सम्बंध में मंगवाया। अपने सदस्यों के भी विचार लिये। 8 अप्रैल 2018 को “नव पल्लव” की स्थापना हुई। मेरे मन को एक विचार बरसों से उद्वेलित कर रहा था कि ऐसी संस्था बनायी जाये जिसमें नये लोगों को मौका मिले।इनमें क्षमताएं तो है लेकिन मौके के अभाव में वे मीडिया या मंच तक नहीं पहुँच पाते हैं। मैने अपना यह विचार वीणा पाण्डेय, अर्पणा संत सिंह, सरिता सिंह और नीता सागर चौधरी को बताया। इन लोगों ने मेरे विचार का समर्थन किया। इस सोच ने “नव पल्लव” को मूर्त रुप दिया।
    फिर देखते देखते लोग इसमें जुड़ते गये, कुछ वरिष्ठ तो अधिकांश नये सदस्य हैं। देखते देखते यह संस्था पुष्पित और पल्लवित होने लगी।
    शहर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं सदस्यों के विचार निम्नलिखित हैं—
    नव पल्लव यद्यपि नई संस्था है लेकिन नवीन उर्जा वाली इस संस्था में विशुद्ध गृहिणियों ने भी पिछले दो वर्षों में अपनी कल्पनाओं, अपनी सोच को जो रंग दिये हैं वो अवर्णनीय है। महिलाओं की संस्था है इसलिये महिलाएं बेहिचक अपनी प्रस्तुति भी देती हैं। संस्था में नये पुराने सभी लोग हैं और सब में सिखने और सिखाने की लगन है जो संस्था के उज्जवल भविष्य को दर्शाती है।

    डॉ अनिता शर्मा
    सचिव *नव पल्लव

    कहने को तो यह साहित्यिक संस्था “नव पल्लव” है पर इसने अब एक वृक्ष का रुप ले लिया है जिसके तले हम खुशी और सन्तोष का अनुभव करते हैं। नई संस्था होने के बावजूद भी इसने साहित्य जगत में अपना खास स्थान बना लिया है। मेरे लेखन के सफर में नव पल्लव का विशेष स्थान है। इसने मेरे लेखन प्रतिभा को पुनर्जीवित किया है और मुझे एक अच्छा साहित्यिक मंच प्रदान किया है जहाँ मुझे आत्मसंतुष्टी होती है। हम सभी यहाँ एक परिवार की तरह है और एक दूसरे का मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन करते हैं।
    मेरी यही शुभकामना है कि नव पल्लव बटवृक्ष की तरह विशाल बने और उसकी शाखायें दूर दूर तक फैले।

    अनिता निधि
    न्यू बाराद्वारी,साक्ची
    जमशेदपुर

    जमशेदपुर में बहुत सारी साहित्यिक संस्थाएं हैं लेकिन वह स्थापित साहित्यकारों के लिये हैं। नये लोगों के लिये कोई संस्था नहीं है। जिसको कुछ नहीं आता है वह मंच पर नहीं जा सकता है। लेकिन मुझे यह कहते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि इस शहर में एक ऐसी संस्था है “नव पल्लव” जो नये लोगों को मौका दे रही है और उन्हें मंच के लिये तैयार कर रही है। इसमें सिर्फ महिलाएं हैं। इस काम का बीड़ा उठाया है जमशेदपुर की साहित्यकार माधुरी मिश्र ने। मैं उन्हें हृदय से आशीर्वाद देता हूँ । मैं उनकी प्रशंसा करता हूँ कि उन्होनें यह कठिन कार्य करने की जिम्मेदारी उठाई है।

    शहर के साहित्य जगत के भीष्म पितामह

    डॉक्टर सी भास्कर राव
    वरिष्ठ साहित्यकार

    आज के दिन ही नव पल्लव की नींव रखी गई थी। नव पल्लव में नए नए पत्ते आते गये ।आज नव पल्लव शहर में एक जाना माना साहित्यिक संस्था बन गया है ।शहर के कुछ वरिष्ठ साहित्यकार इसके सदस्य हैं ,नए रचनाकारों को हम दिल से स्वागत करते हैं ,इनकी रचनाओं में जो त्रुटियां होती हैं उसे सुधारते हैं, परिमार्जित करते हैं। इनकी रचना परिमार्जित हो मंच के लिए तैयार हो जाती हैं। ईश्वर करें ननव पल्लव परिवार फले फुले और विशाल वृक्ष बने ।
    नीता सागर चौधरी
    परसुडीह
    जमशेदपुर

    बहुत जरूरी होता है औरतों के लिए औरतों का एक कोना और यदि बात साहित्य की हो , कलम के दुनिया की हो तो यह अवसर और भी खास, जरूरी और खूबसूरत बन जाता है।

    नव पल्लव एक ऐसा ही मंच उपलब्ध कराता है जहाँ महिलाएँ खुलकर अपनी बात लिख सकती हैं, कह सकती हैं , एक दूसरे से साझा कर सकती हैं और शब्दों के स्वाद को भी महसूस कर सकती हैं ।

    नव पल्लव से जुड़ी जमशेदपुर शहर की महिला रचनाकार लेखन और साहित्यिक कार्यक्रमों के जरिए मानवीय संवेदनाओं और संबंधों की उष्मा को जीवित रखने का एक भागीरथ प्रयास कर रही है। अध्यक्षा माधुरी मिश्र और टीम को भविष्य के लिए भी अनंत शुभकामनायें !

    *कलम गतिशील रहे* !!

    नगर की साहित्यिक संस्था**नव पल्लव* ने बहुत जल्दी हिंदी साहित्यिक जगत में अपनी पहचान बनाई, और सृजन को प्रोत्साहित किया, इसके सदस्यों में सभी नवोदित रचनाकार थे परंतु नियमित अभ्यास एवं प्रेरणा से आज उनकी रचनाएं परिपक्वता प्राप्त कर चुकी हैं, कुछ वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति उन्हें प्रेरित करती है,, जिसकी अध्यक्षा मेरी मित्र माधुरी मिश्रा हैं जो स्वयम् कवयित्री हैं,,जिनकी प्रेरणा एवं प्रोत्साहन से यह संस्था नव पल्लव*अब पुष्पित पल्लवित हो चुकी है, वर्ष में एक बार राष्ट्रीय त्योहार 26 जनवरी,होली मिलन, और काव्य गोष्ठियां आयोजित की जाती है,अब तो सस्था सदस्यों की रचनाओं का एक काव्य संकलन भी निकालने जा रही है,,मेरी हार्दिक शुभकामनाएं मंगलकामनाएं नव पल्लव*के लिए,,,
    पद्मा मिश्रा
    वरिष्ठ कवयित्री कथाकार

    नव पल्लव में मेरी छिपी हुई प्रतिभा को पहचान मिली। मुझे लिखना नहीं आता था हां पढ़ने का शौक जरूर था, जब मैं वहां जाने लगी तो मैं लिखने लगी वहां जाकर ही मेरे साहित्य को पहचान मिली । मेरे लेखन मे गलतियों को बड़े प्यार सभी सुधारते है।नव पल्लव संस्था ही नहीं बल्कि एक परिवार है ।मैं नव‌ पल्लव की अध्यक्ष माधुरी मिश्रा की आभारी हूं।होम धन्यवाद
    उपासना सिन्हा
    आदित्यपुर

    नव पल्लव ने उभरते रचनाकारों ,गृहणियों में छुपी प्रतिभा को निखारने का सफल प्रयास किया है ।यह महिलाओं का मार्ग दर्शन करता है क्योंकि यह समूह , यह मंच महिलाओं के लिए ही बना है । आज हमारा “नव पल्लव” एक विशाल वट वृक्ष की तरह फैला भी है ।हमें गर्व है नव पल्लव से जुड़कर ।आज कई बड़ी रचनाकारों से लेकर नई उभरती रचनाकारों का सानिध्य और मार्गदर्शन मिलता सौभाग्य की बात है ।” यहां से सफर की शुरुआत हुई , मंजिलें आसान हुई ,एक नई पहचान हुई।”
    ************************
    साहित्यकार — निवेदिता श्रीवास्तव ,जमशेदपुर

    नव पल्लव का पल्लवित होना प्रतीक है नव सृजन का। नव कोंपलों का प्रस्फुटन पुलकित कर जाता है बागबान को और उसमें आशा की किरण जगा जाती है। अपनी अनुजा माधुरी मिश्र को अशेष शुभकामनायें। मैं उन्हें अपार स्नेह और आशीर्वाद प्रेषित करती हूँ कि आप नवांकुरों को सींचने की जिम्मेदारी को बखूबी निभाते रहें।
    अनेकानेक शुभकामनायें–

    प्राचार्या
    डी बी एम एस कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, कदमा, जमशेदपुर

    नव पल्लव का गठन हुए आज पूरे दो साल हुए हैं। यह महिलाओं की एक साहित्यक संस्था है। सबसे पहले मै श्रोता बनके इस संस्था में गई थी फिर सबकी कविताएँ सुनकर मुझे भी कविताएँ लिखने की इच्छा जागृत हुई, फिर मैं नव पल्लव के गुणी जनों के सानिध्य में रहकर कविताएँ लिखना आरंभ की। नव पल्लव एक परिवार की तरह है और सब मिलजुलकर रहते हैं।
    – निर्मला राव
    “नव पल्लव” जमशेदपुर की साहित्यिक संस्था है ।यहां सिर्फ महिलाएं हैं ,यह संस्था इस उद्देश्य से बनाया गया है की नवोदित साहित्यकारों के रचनाओं को परिष्कृत कर बड़े मंच की योग्य बनाया जाए। कुछ वरिष्ठ साहित्यकारों को भी शामिल किया गया ताकि नए साहित्यकार उनसे सीख सकें ,उनसे प्रेरित हो सकें ।यह संस्था ही नहीं एक परिवार है यह संस्था गतिशील रहेऔर इसी तरह आगे भी पुष्पित पल्लवित होती रहे यही मेरी कामना है।
    वीना कुमारी आदित्यपुर।

    लौह नगरी जमशेदपुर में नव पल्लव एक ऐसी साहित्यिक संस्था है ।जहां केवल महिलाओं को ही अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सृजन करने का अवसर प्राप्त होता है । यहां हर क्षेत्र से आयी महिलाओं की रचनाएं, लघु कहानियां, समीक्षाएं, कविताएं और समय-समय पर कवि गोष्ठियाँ निरंतर चलती रहती है, जिसमें वह अपनी प्रतिभा को निखारती को निखारती रहती हैं यह संस्था संयुक्त परिवार की तरह आपस में एक दूसरे से जुड़ी हुई है। नव पल्लव ऐसे ही पल्लवित और पुष्पित होता रहे । इसी शुभकामनाओं के साथ
    सरोज सिंह परमार

    “नव पल्लव” एक मात्र ऐसी संस्था है जहाँ सिर्फ महिलाएं ही है। इसका उद्देश्य ही है कि नवोदित कलमकारो को मंच देकर उनकी रचनाओं को परिष्कृत कर उन्हें बाहर के मंचों के लिए तैयार होना है। जिसमें गृहणियां भी शामिल है जो अपने सपने को साकार कर रही हैं। यह संस्था मात्र पांच महिलाओं से शुरु हुई थी और आज पैतालिस महिलाएं इस संस्था में अपना योगदान दे रही हैं। ऐसी ही गतिशीलता बनी रहे। हमारी शुभकामना है।

    वीणा पाण्डेय भारती
    नव पल्लव संस्था हालांकि दो साल पहले ही जन्म ली पर यह तीव्र गति से अपना विस्तार करने में सफल रही है। इसके अंतर्गत रचनाकार दिन प्रतिदिन अपनी रचनाओं को परिष्कृत पुष्पित पल्लवित कर रहे हैं ।इस संस्था की सभी बहनें बड़ी लगन और उत्साह के साथ अपना योगदान दे रही हैं ।यह नव पल्लव भविष्य में वट वृक्ष बनकर उभरेगा । समस्त शुभकामनाओं के साथ छाया प्रसाद साहित्यकार

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