
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
दीपावली पर पूर्व सैनिकों ने ‘प्रथम दीया शहीदों के नाम’ जलाकर वीर सपूतों को किया नमन। दीपावली के पावन पर्व पर, जब पूरा देश रोशनी के त्योहार में सराबोर है, जमशेदपुर के पूर्व सैनिकों ने एक अनूठी पहल के माध्यम से देश के वीर शहीदों को याद किया। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर की ओर से दीपावली की पूर्व संध्या पर गोलमुरी स्थित शहीद स्मारक में ‘प्रथम दीया शहीदों के नाम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन वीरों के बलिदान को नमन करना था, जिनकी बदौलत आज हम अपने घरों में चैन की सांस ले रहे हैं।
शहीद स्मारक में ‘प्रथम दीया शहीदों के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम स्थल, गोलमुरी स्थित शहीद स्मारक को दीपों से सजाया गया था। इस दौरान पूर्व सैनिकों और शहर के देशभक्त नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर दीप प्रज्वलित किए। दीपों की रोशनी में शहीद स्मारक का कोना-कोना जगमगा उठा, जो वीर सपूतों के शौर्य और बलिदान का प्रतीक बना हुआ था। उपस्थित लोगों ने वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस को याद करते हुए नमन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परिषद के जिला महामंत्री जितेंद्र कुमार सिंह ने संगठन गीत गाकर किया। इसके बाद उन्होंने शहीद स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि दीपावली का पर्व खुशी का प्रतीक है, लेकिन हमारी यह खुशी उन शहीदों के त्याग की देन है जो सीमाओं पर तैनात रहकर देश की रक्षा करते हैं।
वीर सपूतों के बलिदान की गाथा
कार्यक्रम के संयोजक एवं सेवानिवृत्त सैनिक सत्येंद्र कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सैनिकों का शौर्य और पराक्रम ही उनकी असली पहचान है। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने का साहस हर किसी में नहीं होता। हमारे वीर जवानों का बलिदान राष्ट्र की सबसे श्रेष्ठ परंपरा है। वहीं, प्रदेश महामंत्री सिद्धनाथ सिंह ने शहीदों के माता-पिता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनका त्याग सैन्य परंपरा को गौरवान्वित करता है।
इस अवसर पर क्रीड़ा भारती के झारखंड मंत्री राजीव कुमार ने विशेष रूप से आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब हम उनके सपनों का भारत बनाएंगे। उन्होंने उपस्थित लोगों से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, स्थानीय उद्योगों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की अपील की।
- शहीदों के प्रति सम्मान: देश की रक्षा में लगे जवानों का निरंतर सम्मान करना चाहिए।
- आत्मनिर्भरता का संकल्प: स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करके राष्ट्र की आर्थिक स्थिति मजबूत करें।
- सांस्कृतिक एकता: त्योहारों को देशप्रेम के साथ मनाना एक नई मिसाल है।
अंत में, कार्यक्रम का समापन बड़े ही जोश और उत्साह के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में ‘भारत माता की जय’ और ‘वीर शहीद अमर रहें’ के नारों के साथ वातावरण को गुंजायमान कर दिया। यह कार्यक्रम न केवल शहीदों को नमन करने का एक माध्यम था, बल्कि युवाओं के मन में देशभक्ति की भावना को और भी प्रगाढ़ करने वाला एक प्रेरक अवसर साबित हुआ। जमशेदपुर की इस पहल की हर ओर प्रशंसा हो रही है और यह संदेश पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

