
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
निशा कुमारी भगत की मौत की सीबीआई जांच हो, यह मांग पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने पुरजोर तरीके से उठाई है। उन्होंने हाल ही में जमशेदपुर की सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री निशा कुमारी भगत के असामयिक और दुखद निधन पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जनजातीय समाज के लिए यह एक अत्यंत अपूरणीय क्षति है क्योंकि निशा कुमारी भगत हमेशा आदिवासी समाज के हक-अधिकारों की रक्षा के लिए सजग और संघर्षरत रहती थीं।
निशा कुमारी भगत की मौत की सीबीआई जांच हो और साक्ष्यों को सुरक्षित रखें
अर्जुन मुंडा ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत संवेदनशील करार दिया है। निशा कुमारी भगत ने अपनी मृत्यु से ठीक पहले फेसबुक लाइव के माध्यम से कई गंभीर आरोप लगाए थे। अर्जुन मुंडा का कहना है कि इन आरोपों की सत्यता की जांच करना राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि क्या उनकी शिकायतों पर प्रशासन ने कोई त्वरित कार्रवाई की? क्या उन्हें समय रहते आवश्यक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी? इन सवालों के जवाब आज झारखंड की जनता जानना चाहती है।
राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो सरकार आदिवासी अधिकारों की रक्षा करने का दावा करती है, उसे इस बात का जवाब देना चाहिए कि जब समाज की एक बेटी न्याय के लिए गुहार लगा रही थी, तब पूरी सरकारी व्यवस्था और तंत्र कहाँ सो रहा था? यह केवल एक मौत का मामला नहीं, बल्कि प्रशासन की विफलता का प्रश्न है।
डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
अर्जुन मुंडा ने तीन प्रमुख मांगे रखी हैं जो इस मामले में न्याय दिलाने के लिए अनिवार्य हैं:
- सीबीआई जांच: पूरे मामले की तह तक जाने के लिए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
- साक्ष्य सुरक्षा: फेसबुक लाइव वीडियो सहित सभी डिजिटल साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित किया जाए ताकि उनके साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
- आरोपियों पर कार्रवाई: फेसबुक लाइव में जिन भी व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कठोरतम दंड मिले।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने पीड़ित परिवार और इस मामले से जुड़े गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गवाहों को डराने या धमकाने का प्रयास न हो, यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार का दायित्व है। अर्जुन मुंडा के अनुसार, राज्य में आदिवासी समाज के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। निशा कुमारी भगत की मृत्यु के पीछे के सच को सामने लाना समाज की मांग है। जमशेदपुर प्रशासन को भी चाहिए कि वे इस जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करें और पारदर्शी तरीके से कार्यवाही को आगे बढ़ाएं। यह घटना पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है कि महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील होना होगा।

