आनंद मार्ग ने मनाया शरदोत्सव, आत्मविजय को बताया विजयोत्सव
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
आनंद मार्ग प्रचारक संघ, सरायकेला-खरसावां की ओर से 21 अक्टूबर को आनंद मार्ग स्कूल, काण्ड्रा में शरदोत्सव मनाया गया। इस दौरान बाबा नाम केवलम कीर्तन, नगर कीर्तन और आनंद भोज का आयोजन हुआ। ब्राजील से आए आनंद मार्ग के आचार्य गुणीन्द्रानंद अवधूत ने कहा कि अष्ट पाश और षड्रिपु पर विजय प्राप्त करना ही वास्तविक विजयोत्सव है।
उन्होंने घृणा, शंका, भय, लज्जा, जुगुप्सा, कुल, शील और मान को अष्ट पाश तथा काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य को षड्रिपु बताते हुए इन पर नियंत्रण को साधना का लक्ष्य बताया। उन्होंने दुर्गापूजा के ऐतिहासिक विकास और नवपत्रिका में प्रयुक्त नौ प्रकार की वनस्पतियों के औषधीय महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम को सफल बनाने में भुक्ति प्रधान गोपाल बर्मन, सूर्यप्रकाश, कुणाल दास, भर्तहरि, नरेश बर्मन, जगदुर्लभ, राजकुमार, इत्यादि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

