धान की बालियों में दूध और खेतों में हाथियों का कहर
*महीनों की मेहनत और घर भर अनाज की उम्मीद को हाथियों के पैरों तले रौंदे जाते देख रहे हैं किसान*
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
चांडिल प्रखंड के रसुनिया क्षेत्र में जंगली हाथियों के झुंड ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में धान की बालियां निकल चुकी हैं और दानों में दूध भरने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे समय में हाथियों के झुंड के खेतों में पहुंचने से तैयार होती फसल रौंदी जा रही है। किसानों को आशंका है कि यदि हाथियों की आवाजाही इसी तरह जारी रही तो कटाई से पहले ही बड़ी मात्रा में फसल बर्बाद हो सकती है।
किसानों का कहना है कि धान की इस अवस्था तक पहुंचने में कई महीने की मेहनत, बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च हुआ है। अब फसल तैयार होने के करीब है, लेकिन हाथियों का झुंड रात में खेतों में पहुंचकर फसल को रौंद दे रहा है। इससे किसानों के सामने मेहनत और लागत दोनों डूबने का खतरा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी की सटीक और समय पर जानकारी मिल जाए तो किसान खेतों से दूर रहकर जरूरी सावधानी बरत सकते हैं और गांव स्तर पर बचाव के उपाय भी किए जा सकते हैं। किसानों ने वन विभाग से हाथियों की लोकेशन समय पर साझा करने, प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।

