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    Home » आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की मौत: परीक्षा में ChatGPT का इस्तेमाल और फिर होस्टल रूम में मिला शव
    Headlines मेहमान का पन्ना राष्ट्रीय शिक्षा संपादकीय

    आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की मौत: परीक्षा में ChatGPT का इस्तेमाल और फिर होस्टल रूम में मिला शव

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 19, 2026No Comments4 Mins Read
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    आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की मौत
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    लेखक: इंद्र यादव

    आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की मौत ने पूरे शैक्षणिक जगत को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार को हुई इस दुखद घटना ने न केवल परिसर में शोक की लहर दौड़ा दी है, बल्कि देश के प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और नकल के आधुनिक साधनों के इस्तेमाल पर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर सफलता की इस अंधी दौड़ में हम अपने युवाओं को कहां धकेल रहे हैं।

    आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की मौत: घटना का पूरा ब्यौरा

    आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की शुक्रवार को मौत हो गई। यह खबर सुनकर पूरा कैंपस शोक में डूब गया।

    छात्र का नाम सहिल रविंद्र वाकोड़े था। उम्र सिर्फ 22 साल। वह ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग का दूसरा साल का छात्र था। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला था। छोटे शहर से आईआईटी जैसे बड़े संस्थान तक पहुंचना उसके परिवार के लिए बहुत बड़ी बात थी।

    शुक्रवार सुबह परीक्षा चल रही थी। परीक्षा हॉल में सहिल को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया। उसने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर डालकर जवाब मांगे थे।

    इसके बाद टीचर और विभाग के प्रमुख ने उससे बात की। उन्होंने उसे समझाया और कहा कि कोई सजा नहीं दी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह घटना उसके पढ़ाई के करियर को नुकसान नहीं पहुंचाएगी। सहिल होस्टल वापस चला गया।

    शाम को जब उसके कमरे में कोई जवाब नहीं मिला, तो साथी छात्रों ने दरवाजा खुलवाया। वहां वह मृत पाया गया। पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने केस दर्ज किया है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। जांच चल रही है।

    पिछले सात महीनों में तीसरी घटना से दहशत

    आईआईटी बॉम्बे में पिछले सात महीनों में यह तीसरी ऐसी मौत है। इससे पहले फरवरी और जुलाई में भी दो छात्रों की मौत हो चुकी थी। कैंपस में छात्रों में गुस्सा और डर दोनों है।

    छात्रों का विरोध और प्रशासन की चुप्पी

    छात्रों ने विरोध किया

    मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों छात्र मुख्य गेट पर इकट्ठा हो गए। उन्होंने प्रशासन से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ काउंसलिंग काफी नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। कुछ छात्रों का कहना था कि सहिल को सस्पेंशन का डर दिखाया गया था, लेकिन संस्थान ने साफ कहा कि कोई सजा नहीं दी गई थी। पुलिस को कैंपस में बुलाना पड़ा। परीक्षाएं भी रोक दी गईं।

    सहिल के परिवार के लिए यह खबर आसमान टूटने जैसी है। एक बेटा जो आईआईटी पहुंचकर परिवार का नाम रोशन करने वाला था, वह अब वापस नहीं आएगा। गांव-कस्बे के कई परिवार अपने बच्चों को बड़ी-बड़ी उम्मीदों के साथ इन संस्थानों में भेजते हैं। पढ़ाई, नौकरी, नाम- रोशनी… सब कुछ एक बच्चे के कंधों पर होता है।

    क्या है असली समस्या: नकल नहीं, वह माहौल जहां गलती गुनाह बन जाती है

    यह घटना हमें कई सवाल सोचने पर मजबूर करती है।

    आईआईटी जैसे संस्थानों में पढ़ाई का दबाव बहुत ज्यादा होता है। हर छात्र टॉपर बनना चाहता है। हर कोई सोचता है कि एक छोटी सी गलती से सब कुछ खत्म हो जाएगा। सहिल ने परीक्षा में गलती की। टीचरों ने कहा कि कोई सजा नहीं होगी। फिर भी वह अकेला रह गया। उसके मन में क्या चल रहा होगा, कोई नहीं जानता।

    आजकल परीक्षा में ChatGPT जैसे टूल्स का इस्तेमाल बढ़ गया है। लेकिन असली समस्या नकल की नहीं है। असली समस्या है वह माहौल जहां गलती करने पर छात्र खुद को दोषी समझने लगता है। जहां बात करने वाला कोई नहीं होता। जहां मानसिक परेशानी को कमजोरी माना जाता है।

    काउंसलिंग की व्यवस्था तो है, लेकिन जब जरूरत पड़ती है तब वह कितनी काम आती है? कई छात्र अकेले रहते हैं। परिवार दूर होता है। दोस्तों के बीच भी प्रतिस्पर्धा रहती है। ऐसे में छोटा सा झटका भी बहुत बड़ा लगने लगता है।

    समाधान की दिशा: संस्थानों और परिवारों को बदलनी होगी सोच

    सिर्फ दुख जताने से काम नहीं चलेगा। संस्थानों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सच में ध्यान देना होगा। सिर्फ परीक्षा और नंबर नहीं, बल्कि छात्रों की परेशानियों को भी सुनना होगा। परिवारों को भी बच्चों पर इतना दबाव नहीं डालना चाहिए कि वे खुद को खो दें।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है और शैक्षणिक संस्थानों को सहायक वातावरण बनाने की तत्काल आवश्यकता है। अधिक जानकारी के लिए WHO Mental Health देखें।

    सहिल की मौत एक और याद दिलाती है कि सफलता की दौड़ में कई युवा हार जाते हैं। उनकी जान चली जाती है, लेकिन सवाल बाकी रह जाते हैं।

    कितने और बच्चों की जरूरत है इस सिस्टम को बदलने के लिए

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