रांची. झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब चतरा से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक जनार्दन पासवान के छोटे बेटे सौरभ के कथित अपहरण की सूचना सामने आई. बताया गया कि घटना विधानसभा थाना क्षेत्र में स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के बाहर सोमवार शाम करीब पांच बजे हुई. सूचना मिलते ही रांची पुलिस हरकत में आई और इलाके की घेराबंदी कर सर्च अभियान शुरू किया. पुलिस की तत्परता के बाद सौरभ को अरगोड़ा क्षेत्र से सकुशल बरामद कर लिया गया. घटना के बाद पुलिस अब पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर सौरभ को किस वजह से और किन लोगों ने अपने साथ ले जाने की कोशिश की.
प्राप्त जानकारी के अनुसार सौरभ रांची स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा है. सोमवार शाम यूनिवर्सिटी के बाहर उसके साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने और इसके बाद जबरन वाहन में बैठाकर ले जाने की बात सामने आई. मामले की जानकारी विधायक जनार्दन पासवान तक पहुंचने के बाद पुलिस को सूचना दी गई. विधायक ने अपने बेटे के साथ मारपीट किए जाने और उसे जबरन गाड़ी में बैठाकर ले जाने की बात कही है.
एमिटी यूनिवर्सिटी के बाहर हुई घटना
घटना सोमवार शाम करीब पांच बजे की बताई जा रही है. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सौरभ एमिटी यूनिवर्सिटी के बाहर मौजूद था. इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे. आरोप है कि पहले उसे थार वाहन से उतारकर उसके साथ मारपीट की गई और फिर उसे जबरन दूसरी गाड़ी में बैठाकर वहां से ले जाया गया.
बताया जा रहा है कि कथित अपहरण में थार और स्कॉर्पियो का इस्तेमाल किया गया. घटना की सूचना सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल मामले को गंभीरता से लिया. चूंकि मामला एक विधायक के बेटे से जुड़ा था, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने भी तेजी से कार्रवाई शुरू की.
हालांकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है. पुलिस अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही है और घटनाक्रम से जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है.
सूचना मिलते ही सक्रिय हुई रांची पुलिस
सौरभ के कथित अपहरण की सूचना मिलते ही रांची पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी. पुलिस ने संभावित रास्तों और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की. साथ ही इलाके में सर्च अभियान चलाया गया.
पुलिस की सक्रियता का परिणाम यह रहा कि कुछ ही घंटों के भीतर सौरभ को अरगोड़ा क्षेत्र से सकुशल बरामद कर लिया गया. उसकी बरामदगी के बाद परिवार और विधायक के समर्थकों ने राहत की सांस ली.
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि सौरभ को घटनास्थल से अरगोड़ा तक कैसे ले जाया गया और इस पूरे घटनाक्रम में कितने लोग शामिल थे. पुलिस के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कथित रूप से इस्तेमाल किए गए वाहनों और उनके आवागमन की जानकारी हासिल करना है.
सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा घटनाक्रम का राज
जांच के दौरान पुलिस एमिटी यूनिवर्सिटी और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे और सौरभ के साथ क्या हुआ.
सीसीटीवी फुटेज से घटनास्थल पर मौजूद वाहनों की पहचान करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. थार और स्कॉर्पियो के संबंध में सामने आई जानकारी की भी पुलिस जांच कर रही है. इसके अलावा यूनिवर्सिटी के बाहर से लेकर अरगोड़ा क्षेत्र तक संभावित मार्गों के कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांच का हिस्सा हो सकती है.
जांच एजेंसियां घटनाक्रम की समय-रेखा तैयार करने में जुटी हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सौरभ को कब और किस स्थान से वाहन में बैठाया गया तथा उसके बाद वाहन किस रास्ते से आगे बढ़ा.
विधायक ने बताई बेटे के साथ मारपीट की बात
चतरा विधायक जनार्दन पासवान ने बताया कि उनके बेटे सौरभ के साथ मारपीट की गई और उसे जबरदस्ती अपने साथ ले जाया गया. विधायक के मुताबिक उनका बेटा रांची की एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करता है.
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी के गेट के पास सौरभ को थार से उतारकर उसके साथ मारपीट की गई. इसके बाद उसे स्कॉर्पियो में बैठाकर वहां से ले जाने की बात सामने आई.
पुलिस अब विधायक के बयान और घटनास्थल से मिले संभावित साक्ष्यों को जांच के अन्य तथ्यों से जोड़ रही है. पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना का वास्तविक स्वरूप क्या था और इसके पीछे कौन लोग थे.
चतरा पुलिस ने दिया तकनीकी सहयोग
मामले की जांच में रांची पुलिस को चतरा पुलिस से भी तकनीकी सहयोग मिला. सौरभ के संबंध में उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसकी तलाश तेज की. इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस को अरगोड़ा क्षेत्र में उसके होने की जानकारी मिली और वहां से उसे सकुशल बरामद कर लिया गया.
दो जिलों की पुलिस के बीच समन्वय से कार्रवाई को तेजी मिली. घटना के तत्काल बाद तकनीकी इनपुट जुटाए जाने से पुलिस को संभावित स्थान तक पहुंचने में मदद मिली.
पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सौरभ को अरगोड़ा तक कौन लेकर गया था और वहां उसे किस परिस्थिति में रखा गया. इस संबंध में पुलिस की पूछताछ और जांच के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है.
बरामदगी के बाद भी जांच जारी
सौरभ की सकुशल बरामदगी से परिजनों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन पुलिस के सामने अभी कई सवाल हैं. कथित तौर पर सौरभ को जबरन ले जाने वाले लोग कौन थे? घटना के पीछे क्या कारण था? क्या यह पहले से सुनियोजित था या किसी विवाद के बाद अचानक घटनाक्रम सामने आया? थार और स्कॉर्पियो की भूमिका क्या रही? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच में सामने आने हैं.
पुलिस घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटा सकती है. यूनिवर्सिटी परिसर और बाहर की गतिविधियों से जुड़े लोगों से पूछताछ कर घटना की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
सौरभ के सकुशल मिलने के बाद पुलिस अब आरोपियों तक पहुंचने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है. यदि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आपस में मेल खाते हैं, तो घटना में शामिल लोगों की पहचान करने में पुलिस को मदद मिल सकती है.
विधायक के बेटे की बरामदगी से मिली राहत
घटना की सूचना सामने आने के बाद चतरा से लेकर रांची तक राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई थी. विधायक के बेटे से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस पर भी तत्काल कार्रवाई का दबाव था. ऐसे में पुलिस ने बिना समय गंवाए सर्च अभियान शुरू किया और चंद घंटों में सौरभ को सकुशल बरामद कर लिया.
बरामदगी की पुष्टि विधायक जनार्दन पासवान ने भी की है. फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि सौरभ सुरक्षित है. हालांकि कथित अपहरण और मारपीट की घटना को लेकर पुलिस की जांच जारी है.
रांची पुलिस अब पूरे घटनाक्रम का सत्यापन कर रही है. घटनास्थल से लेकर सौरभ की बरामदगी वाले स्थान तक की गतिविधियों को जांच के दायरे में रखा गया है. पुलिस का अगला कदम घटना में शामिल संदिग्धों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी की दिशा में हो सकता है.
फिलहाल विधायक पुत्र की सकुशल बरामदगी ने परिवार को राहत जरूर दी है, लेकिन इस घटना ने रांची में सुरक्षा व्यवस्था और राजधानी में पढ़ने वाले बाहर के विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह पूरा घटनाक्रम वास्तव में किस वजह से हुआ और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार थे.

