लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
टाटा स्टील की खेल विरासत और प्रतिबद्धता
टाटा स्टील ने खेलों के प्रति अपनी करीब एक सदी पुरानी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए खिलाड़ियों को मंच देने के साथ स्वस्थ, अनुशासित और सशक्त समुदायों के निर्माण पर जोर दिया है। कंपनी की खेल विरासत की नींव सर दोराबजी टाटा ने 1920 में एंटवर्प ओलंपिक में भारत की पहली ओलंपिक टीम को आर्थिक सहयोग देकर रखी थी।
विविध खेल अकादमियां और उल्लेखनीय उपलब्धियां
टाटा स्टील आज 19 खेल विधाओं में अकादमियां एवं प्रशिक्षण केंद्र संचालित करती है। कंपनी की खेल उपलब्धियों में 1 पद्म भूषण, 12 पद्म श्री, 1 खेल रत्न, 6 द्रोणाचार्य, 42 अर्जुन और 1 ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार शामिल हैं। टाटा फुटबॉल अकादमी, टाटा आर्चरी अकादमी, नवल टाटा हॉकी अकादमी, टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन, रोइंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग अकादमियां प्रतिभाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी और टाटा फुटबॉल अकादमी की सफलता
दीपिका कुमारी, कोमोलिका बारी, अंकिता भकत, भजन कौर, जयंत तालुकदार और उमेश विक्रम कुमार जैसे खिलाड़ी टाटा स्टील के खेल कार्यक्रमों से निकले हैं। 1987 में स्थापित टाटा फुटबॉल अकादमी अब तक 300 से अधिक कैडेट्स को प्रशिक्षित कर चुकी है और 2026-27 के लिए उसे AIFF की 5-स्टार मान्यता मिली है।
जमीनी स्तर पर सामुदायिक प्रभाव और साहसिक खेल
जमीनी स्तर पर भी कंपनी का विशेष फोकस है। 2025-26 में 29 हजार से अधिक युवाओं ने सामुदायिक खेल पहलों में हिस्सा लिया। वहीं टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन से जुड़े 13 पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट फतह कर चुके हैं। कंपनी टाटा स्टील वर्ल्ड 25K, जमशेदपुर रन, जोडा एवं कपिलाश रन-ए-थॉन तथा टाटा स्टील चेस इंडिया जैसे आयोजनों के जरिए भी खेल संस्कृति को बढ़ावा दे रही है।
अधिक जानकारी के लिए टाटा स्टील की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

