मुंबई। मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह के पास राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मक्के की एक खेप से करीब 55 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद किया है। जब्त नशीले पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 300 करोड़ रुपये बताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, यह खेप पाकिस्तान स्थित एक कथित नार्को-तस्करी सिंडिकेट से जुड़ी हुई है। प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क का संबंध मोहम्मद हुसैन दाद के नेतृत्व वाले गिरोह से सामने आने की बात कही गई है। मामले में दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
डीआरआई अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट के नजदीक स्थित एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस) में की गई। खुफिया जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने एक संदिग्ध कंटेनर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कंटेनर में रखी मक्के की खेप के बीच एक ऐसा बैग मिला, जिसमें मक्के के साथ संदिग्ध पदार्थ मिलाया गया था। मौके पर मौजूद मोबाइल फोरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल की टीम ने पदार्थ की जांच की और प्रारंभिक परीक्षण में इसकी पहचान मेथामफेटामाइन के रूप में की।
अधिकारियों के अनुसार, बरामद मेथामफेटामाइन का कुल वजन सूखे वजन के आधार पर 55 किलोग्राम है। इसकी कीमत करीब 300 करोड़ रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की बरामदगी को तस्करी नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेप को भारत से कहां भेजा जाना था और इसके पीछे स्थानीय स्तर पर कौन-कौन से लोग या कारोबारी जुड़े हुए थे।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित पाकिस्तान स्थित सिंडिकेट के हैंडलरों ने पहले मुंबई की कुछ आयात-निर्यात कंपनियों से संपर्क स्थापित किया था। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश की एक ट्रेडिंग फर्म से संपर्क किया और 22 टन मक्के के निर्यात से जुड़ी व्यवस्था तैयार की। बताया गया है कि सिंडिकेट के एजेंट ने आगे की प्रक्रिया में भूमिका निभाई और करीब 17.5 टन मक्के की खेप की व्यवस्था कर उसे पैक कराया गया।
इसके बाद तैयार माल को न्हावा शेवा स्थित कंटेनर फ्रेट स्टेशन में लाया गया, जहां से उसे आगे भेजा जाना था। डीआरआई को मिली विशेष खुफिया सूचना के आधार पर इसी कंटेनर की जांच की गई। अधिकारियों ने जब मक्के की खेप को खंगाला तो एक बैग में संदिग्ध पदार्थ मिला। मौके पर की गई फोरेंसिक जांच में उसके मेथामफेटामाइन होने की पुष्टि हुई।
जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क के संचालन के तरीके और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों को संदेह है कि कथित सिंडिकेट ने सामान्य कारोबारी माल की आड़ में नशीले पदार्थ को सीमा पार भेजने की कोशिश की। मक्के जैसी सामान्य कृषि उपज की खेप का इस्तेमाल कथित तौर पर तस्करी के लिए किया जाना जांच एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।
इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि खेप की पैकिंग, परिवहन और कंटेनर तक पहुंचाने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या मुंबई और उत्तर प्रदेश में सक्रिय कुछ कारोबारी या अन्य स्थानीय नेटवर्क इस कथित तस्करी से जुड़े थे।
डीआरआई अब जब्त किए गए नशीले पदार्थ के स्रोत और अंतिम गंतव्य की जानकारी जुटाने में लगी है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि पाकिस्तान स्थित कथित नेटवर्क के संचालकों ने भारत में संपर्क किस माध्यम से स्थापित किया और स्थानीय स्तर पर उनके लिए कौन-कौन से संसाधन उपलब्ध कराए गए। एजेंसी कंटेनर की आवाजाही, संबंधित कारोबारी दस्तावेजों और खेप से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।
मेथामफेटामाइन एक अत्यधिक नशीला सिंथेटिक पदार्थ है और इसकी अवैध तस्करी को लेकर सुरक्षा एवं जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई करती रही हैं। बड़ी मात्रा में इसकी बरामदगी से यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क सामान्य व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला का इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में कंटेनर आधारित तस्करी की जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि बड़ी मात्रा में माल के बीच प्रतिबंधित पदार्थ छिपाने की कोशिश की जा सकती है।
न्हावा शेवा देश के प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्रों में शामिल है और यहां से बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात गतिविधियां होती हैं। ऐसे में किसी सामान्य कारोबारी खेप में कथित तौर पर प्रतिबंधित पदार्थ की मौजूदगी सामने आने से कंटेनर जांच और खुफिया निगरानी की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। डीआरआई की यह कार्रवाई इसी तरह की खुफिया सूचना आधारित जांच का परिणाम बताई जा रही है।
इस बरामदगी के बाद जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाएगी कि 22 टन मक्के की प्रस्तावित खेप और तैयार की गई 17.5 टन खेप के दस्तावेजों में क्या जानकारी दर्ज थी। संबंधित ट्रेडिंग फर्म, निर्यात से जुड़े दस्तावेज, कंटेनर बुकिंग और माल की पैकिंग से जुड़े रिकॉर्ड जांच के दायरे में आ सकते हैं। इन दस्तावेजों के जरिए कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई मेथामफेटामाइन की कीमत करीब 300 करोड़ रुपये है। हालांकि नशीले पदार्थ की बाजार कीमत अलग-अलग परिस्थितियों में बदल सकती है, इसलिए यह आकलन जांच एजेंसी द्वारा बताए गए अनुमान पर आधारित है। मामले में आगे की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तस्करी की पूरी योजना कितने स्तरों पर संचालित की गई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार देश में नशीले पदार्थों की तस्करी और नशे के खिलाफ अभियान को तेज करने पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल में देश को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया है। सरकार की ओर से नशे के खिलाफ जागरूकता और रोकथाम से जुड़े अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
केंद्र सरकार के नशामुक्ति अभियान के तहत युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में इसके दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। खेल गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों, पदयात्राओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक भागीदारी के जरिए नशे के खिलाफ संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
वर्ष 2020 में शुरू किए गए नशामुक्त भारत अभियान का उद्देश्य नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना है। ऐसे में मुंबई के पास 55 किलो मेथामफेटामाइन की बरामदगी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और भारत में उनके संभावित स्थानीय संपर्कों पर निगरानी की जरूरत को सामने लाती है।
फिलहाल डीआरआई ने 55 किलोग्राम मेथामफेटामाइन जब्त कर दो लोगों को हिरासत में लिया है। कथित पाकिस्तान आधारित सिंडिकेट से इसके संबंध की जांच जारी है। एजेंसी अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, स्थानीय सहयोगियों, खेप के वास्तविक गंतव्य और तस्करी के पूरे रास्ते का पता लगाने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में सामने आने वाली अन्य कड़ियों और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

