प्रेमचंद की कहानियों का किया पुनर्पाठ : प्रेमचंद जयंत
करीम सिटी कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में ‘उपन्यास सम्राट’ मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और कथा सम्राट के जीवन एवं उनके साहित्य को याद किया।समारोह का मुख्य आकर्षण विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रेमचंद की कालजयी कहानियों का पुनर्पाठ (पुनरावलोकन व सस्वर वाचन) रहा, जिसके माध्यम से छात्रों ने उनकी रचनाओं के विभिन्न सामाजिक और मानवीय पहलुओं को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। कहानियों का पुनर्पाठ तानिया परवीन ,शाश्वत त्रिपाठी, सिद्धार्थ कुमार, सुशांत बोबोंगा आदि छात्र-छात्राओं ने किया।
प्राध्यापिका डॉ. संध्या सिन्हा ने प्रेमचंद के जीवन, चिंतन और उनकी साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी लेखनी से भारतीय साहित्य को जन-जन से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनकी भाषा की सादगी और विचारों की गहराई ही उन्हें ‘कथा सम्राट’ बनाती है।
अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र गुप्ता ने प्रेमचंद की कहानियों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “मुंशी प्रेमचंद की रचनाएँ केवल अपने दौर का इतिहास नहीं हैं, बल्कि आज के दौर की सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को समझने का भी अचूक माध्यम हैं। उनकी कहानियों में आम आदमी, किसान और शोषित वर्ग का जो दर्द झलकता है, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। प्रेमचंद का साहित्य समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है।”
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्राध्यापक डॉ. फिरोज आलम ने प्रेमचंद के आदर्शो पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन सेमेस्टर 4 के छात्र सुशांत बोबोंगा ने किया।

