लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: भुइयाडीह स्थित इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती में संभावित अतिक्रमण हटाओ अभियान की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। बुधवार को बड़ी संख्या में बस्तीवासी उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से कार्रवाई पर रोक लगाने तथा राहत देने की मांग की।
भुइयाडीह स्थित इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती पर प्रशासन की योजना
बस्तीवासियों का कहना है कि वर्ष 2023 में शहर की 86 बस्तियों में कराए गए सर्वेक्षण के दौरान उनके क्षेत्र के 145 मकानों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए चिन्हित किया गया था। इसके बाद संबंधित परिवारों को नोटिस भी जारी किए गए थे। उनका आरोप है कि अब इन मकानों को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने दावा किया कि 6 अगस्त को दंडाधिकारी की नियुक्ति कर बुलडोजर चलाने की योजना बनाई गई है। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक आदेश या पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रदर्शन के दौरान बस्तीवासियों ने वहां से गुजर रहे पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता और मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता का काफिला रोककर अपनी समस्या से अवगत कराया और हस्तक्षेप की मांग की। दोनों नेताओं ने लोगों की बातें सुनीं और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
इस मौके पर पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि यदि लोगों को हटाना आवश्यक है, तो सरकार को पहले प्रधानमंत्री आवास योजना या किसी अन्य सरकारी आवास योजना के तहत प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए बिना गरीब परिवारों के मकान तोड़ना उचित नहीं होगा।
बस्तीवासियों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई पर पुनर्विचार करने तथा उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
प्रभावित परिवारों की चिंताएं और मांगें
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे दशकों से इस भूमि पर रह रहे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज भी हैं। अचानक अतिक्रमण के नोटिस और बुलडोजर की कार्रवाई की आशंका ने उनके जीवन को अनिश्चितता में डाल दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास की मांग को लेकर उन्होंने प्रशासन से लिखित आश्वासन मांगा है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के गरीब परिवारों को बेदखल करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले पुनर्वास योजना को सार्वजनिक किया जाए। इस संबंध में झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कानूनी पहलू और पूर्व की घटनाएं
झारखंड उच्च न्यायालय के कई फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने निर्णयों में कहा है कि गरीबों को बेघर करने से पहले उनके लिए वैकल्पिक आवास सुनिश्चित किया जाए। जमशेदपुर में पूर्व में भी ऐसी कार्रवाइयों पर न्यायालय ने रोक लगाई है जब पुनर्वास योजना नहीं थी।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका और आश्वासन
पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता और मेयर सुधा गुप्ता ने बस्तीवासियों को आश्वासन दिया है कि वे मुख्यमंत्री और नगर विकास विभाग से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, बस्तीवासी लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े हैं।
आगे की रणनीति और प्रशासनिक प्रक्रिया
जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, दंडाधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। यदि 6 अगस्त को कार्रवाई होती है, तो भारी पुलिस बल तैनात किए जाने की संभावना है। बस्तीवासियों ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है।

