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    Home » जमशेदपुर में कथित अवैध वसूली: तीन पुलिसकर्मी निलंबित
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    जमशेदपुर में कथित अवैध वसूली: तीन पुलिसकर्मी निलंबित

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 24, 2026Updated:July 24, 2026No Comments4 Mins Read
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में कथित अवैध वसूली का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जहां ट्रैफिक पुलिसकर्मियों द्वारा वाहन जांच के दौरान बाइक चालकों से अवैध रूप से रुपये वसूलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आम जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाई है। वाहन जांच के नाम पर होने वाली इस तरह की उगाही न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह खाकी वर्दी की गरिमा को भी धूमिल करती है। नागरिकों का आरोप है कि शहर के विभिन्न चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान का भय दिखाकर अवैध वसूली आम बात हो गई है, लेकिन इस बार वीडियो साक्ष्य के रूप में सामने आने के बाद विभाग को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।

    कथित अवैध वसूली का पर्दाफाश

    जमशेदपुर। बिष्टुपुर ट्रैफिक थाना क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में ट्रैफिक पुलिस द्वारा एक बाइक चालक से रुपये लेते हुए दिखाई देने के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में आरोप सही पाए जाने पर एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब ने एएसआई ललन सिंह तथा आरक्षी प्रकाश कुमार साव और पंकज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    वायरल वीडियो बना कार्रवाई का आधार

    वायरल वीडियो में ट्रैफिक पुलिस रीगल गोलचक्कर के पास वाहन जांच करती दिखाई दे रही है। वीडियो के अनुसार एक बाइक चालक को रोककर पहले पूछताछ की जाती है, फिर उसे एएसआई के पास भेजा जाता है। आरोप है कि चालान से बचाने के नाम पर उससे नकदी ली गई, जिसकी पूरी घटना मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।

    डीएसपी ट्रैफिक की जांच में आरोप सही

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने ट्रैफिक डीएसपी को जांच का निर्देश दिया। जांच के दौरान वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि हुई और रुपये लेने की बात सही पाई गई। जांच रिपोर्ट मिलते ही एसएसपी ने संबंधित तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

    सड़क सुरक्षा अभियान पर उठे सवाल

    इस घटना के बाद सड़क सुरक्षा और वाहन जांच अभियान की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सड़क सुरक्षा के नाम पर अवैध वसूली की घटनाएं सामने आती हैं तो इससे पुलिस की साख प्रभावित होती है और आम जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है।

    रीगल गोलचक्कर पर हुई थी घटना

    जानकारी के अनुसार बिष्टुपुर ट्रैफिक पुलिस रीगल गोलचक्कर के पास नियमित वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक बाइक चालक को रोककर कथित रूप से चालान से बचाने के बदले नकदी लेने का आरोप लगा। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विभागीय जांच शुरू हुई, जिसमें आरोप सही पाए जाने पर तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

    कानूनी जानकारों का मानना है कि ड्यूटी के दौरान रिश्वत लेना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है। निलंबन के अलावा इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जाना चाहिए। इस तरह की घटनाएं पुलिस सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। झारखंड पुलिस के लिए यह एक सबक है।

    स्थानीय नागरिकों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए मांग की है कि केवल निलंबन ही काफी नहीं है, बल्कि दोषी पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। साथ ही, ट्रैफिक पुलिस के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। [INTERNAL_LINK_HOLDER]

    इस घटना से सबक लेते हुए पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह वाहन जांच के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करे और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे, ताकि जनता का विश्वास कायम रह सके। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

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