लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने बूथ सशक्तिकरण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया है। झारखंड जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में संगठनात्मक ढांचे को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए पार्टी लगातार बैठकें और प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रही है। इसी कड़ी में जमशेदपुर में हुई संयुक्त संगठनात्मक बैठक ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया है।
बूथ सशक्तिकरण पर भाजपा की रणनीतिक बैठक
आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने की दिशा में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में झारखंड भाजपा के निर्देशानुसार जमशेदपुर महानगर एवं पूर्वी सिंहभूम जिले की संयुक्त संगठनात्मक बैठक भालूबासा स्थित शीतला भवन सभागार में आयोजित की गई। बैठक में संगठन विस्तार, बूथ सशक्तिकरण और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के मुख्य अतिथि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास रहे। उनके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, प्रदेश महामंत्री सह पूर्व मंत्री अमर बाउरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में दोनों संगठनात्मक जिलों के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, बूथ अध्यक्ष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
बूथ सशक्तिकरण और चुनावी तैयारियों पर चर्चा
बैठक को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत बूथ संगठन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से “मेरा बूथ, सबसे मजबूत” अभियान को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही प्रत्येक बूथ पर संगठन को सक्रिय, सशक्त और जनसंपर्क में अग्रणी बनाने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में आगामी 2 अगस्त से सभी बूथ समितियों की बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया गया। नेताओं ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएं तथा अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ने का अभियान चलाएं।
बूथ सशक्तिकरण के लिए आगे की राह
पार्टी नेताओं ने कहा कि मजबूत संगठन और समर्पित कार्यकर्ताओं के बल पर भाजपा आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अभी से चुनावी तैयारियों में पूरी सक्रियता के साथ जुटने और झारखंड में एनडीए की सरकार बनाने के लक्ष्य को लेकर कार्य करने का आह्वान किया। बैठक का समापन संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा बूथ स्तर तक पार्टी की पहुंच सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ।
झारखंड की राजनीति में बूथ प्रबंधन का महत्व
झारखंड में बूथ सशक्तिकरण की रणनीति नई नहीं है, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता बढ़ गई है। राज्य में आदिवासी बहुल इलाकों, शहरी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों की विविध सामाजिक-आर्थिक संरचना को देखते हुए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता ही जीत का आधार बनती है। रघुवर दास जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि केंद्रीय नेतृत्व झारखंड को लेकर कितना गंभीर है। भाजपा का मेरा बूथ, सबसे मजबूत अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस परिकल्पना का हिस्सा है जिसमें वे संगठन को सरकार से बड़ा मानते हैं।
जमशेदपुर औद्योगिक नगरी होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यहां पूर्वी सिंहभूम जिले की सीमाएं बंगाल और ओडिशा से मिलती हैं, जिससे सीमावर्ती बूथों पर विशेष निगरानी और संगठन की आवश्यकता होती है। बैठक में भालूबासा स्थित शीतला भवन का चयन भी रणनीतिक था, क्योंकि यह क्षेत्र कार्यकर्ताओं की पहुंच के लिहाज से सुगम है। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को बूथ स्तर तक ले जाने का जो निर्देश दिया है, वह सीधे मतदाताओं के जीवन से जुड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड में विपक्षी गठबंधन की चुनौती से निपटने के लिए भाजपा का बूथ स्तरीय प्रबंधन ही निर्णायक साबित होगा। 2 अगस्त से शुरू होने वाली बूथ समितियों की बैठकें इस दिशा में एक ठोस कदम हैं। इन बैठकों में बूथ अध्यक्ष, बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) और पन्ना प्रमुखों की भूमिका तय की जाएगी। इसके अलावा नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और डिजिटल माध्यमों से प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं को [INTERNAL_LINK_HOLDER] के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास देशभर में करोड़ों की संख्या में प्रशिक्षित कार्यकर्ता हैं। भाजपा का इतिहास बताता है कि उसने हमेशा बूथ को शक्ति केंद्र माना है। झारखंड में भी इसी फॉर्मूले को धार दी जा रही है। आने वाले महीनों में ऐसी और बैठकें प्रमंडल और जिला स्तर पर आयोजित होंगी, जिससे संगठन की जड़ें और गहरी होंगी।

