लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
झारखंड में जांच घोटाला के गंभीर आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में न केवल घोटाले हो रहे हैं, बल्कि उनकी जांच के नाम पर भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग तेज हो गई है।
पिछले कुछ महीनों में झारखंड में कई कथित घोटाले सामने आए हैं, जिनमें JSSC और JPSC की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं। इन मामलों की जांच के लिए गठित एसआईटी की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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जांच घोटाला: प्रमुख आरोप और मांगें
झारखंड में विभिन्न कथित घोटालों और उनकी जांच को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि राज्य में केवल घोटाले ही नहीं, बल्कि उनकी जांच के नाम पर भी अनियमितताएं हो रही हैं। इसे ‘जांच घोटाला’ बताते हुए पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई गई है।
जारी बयान में कहा गया है कि इससे पहले झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़े कथित घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी और महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने के बावजूद मामले में केवल तत्कालीन अध्यक्ष का इस्तीफा लेकर कार्रवाई सीमित कर दी गई। अब झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामले में भी उसी तरह की प्रक्रिया अपनाए जाने का आरोप लगाया गया है। बयान में यह भी दावा किया गया है कि शराब, जमीन, अवैध खनन और DMFT से जुड़े कथित घोटालों की जांच में वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के बजाय प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों को बचाने तथा साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही आरोप लगाया गया कि कुछ नौकरशाहों के माध्यम से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग, प्राकृतिक संपदाओं की लूट और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बयान जारी करने वालों ने मांग की है कि केवल कथित घोटालों की ही नहीं, बल्कि उनकी जांच की प्रक्रिया की भी CBI से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विपक्षी दलों ने मांग की है कि केवल घोटालों की ही नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया की भी CBI से स्वतंत्र जांच हो। उनका कहना है कि इससे प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों को बचाने के प्रयासों का पर्दाफाश होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में प्रमुख मुद्दा बन सकता है। विपक्षी गठबंधन ने इसे जांच घोटाला बताते हुए सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। वहीं सत्ताधारी दल ने आरोपों को निराधार बताते हुए जांच एजेंसियों पर भरोसा जताया है।
CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी की निष्पक्ष जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। इससे पहले भी कई राज्यों में CBI जांच के बाद बड़े घोटालों का खुलासा हुआ है।
इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्ष का दबाव बढ़ रहा है कि जांच घोटाला की सच्चाई सामने लाने के लिए सर्वोच्च जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

