नौकरी की मांग को लेकर बोकारो जनरल अस्पताल में हंगामा।
राष्ट्र संवाद संवादाता
इलाज का खर्च भारी पड़ गया या एक कर्मचारी की जान सस्ती थी? बीएसएल कर्मी की मौत के बाद उठे कई सवाल
बोकारो स्टील प्लांट के एसएमएस-2 में कार्यरत कर्मी सुभाष चंद्र मोदी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत कई ऐसे सवाल छोड़ गई है जिनका जवाब परिवार आज भी तलाश रहा है। परिजनों का आरोप है कि 30 अप्रैल को ड्यूटी के दौरान घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए पहले बोकारो जनरल अस्पताल और फिर कोलकाता के अपोलो अस्पताल भेजा गया। परिवार का दावा है कि जब उनकी हालत में सुधार होने लगा, तभी इलाज का खर्च अधिक होने की बात कहकर उन्हें वापस बुला लिया गया।
परिजनों का कहना है कि बीजीएच लौटने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई, लेकिन बार-बार आग्रह के बावजूद समय पर रेफर नहीं किया गया। आखिरकार 15 जुलाई को रांची मेडिका भेजा गया, जहां 17 जुलाई को उनकी मौत हो गई।
अब सवाल सिर्फ एक कर्मचारी की मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है जिस पर अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और इलाज की जिम्मेदारी होती है। यदि परिजनों के आरोप सही हैं, तो क्या खर्च बचाना एक कर्मचारी की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया था? और यदि आरोप गलत हैं, तो बीएसएल प्रबंधन को पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट जवाब देकर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
मृतक महेशपुर कॉलोनी के निवासी थे। उनकी मौत के बाद परिजनों ने बोकारो जनरल अस्पताल में हंगामा करते हुए आश्रित को नौकरी, न्याय और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

