Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » संसद का मानसून सत्र: बहस हो, टकराव नहीं, लोकतंत्र की गरिमा बनाए संसद
    Breaking News Headlines राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय

    संसद का मानसून सत्र: बहस हो, टकराव नहीं, लोकतंत्र की गरिमा बनाए संसद

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 20, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    संसद का मानसून सत्र
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: देवानंद सिंह

    संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अनेक मुद्दों पर गहरे मतभेद हैं। विपक्ष ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी, पेपर लीक, मणिपुर, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, एथेनॉल नीति और विदेश नीति जैसे विषयों पर चर्चा की मांग की है, जबकि सरकार ने सभी दलों से सदन को सुचारू रूप से चलाने और विधेयकों पर सार्थक बहस करने की अपील की है। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान संसद के भीतर संवाद और विमर्श से ही निकल सकता है।

    संसद का मानसून सत्र: संवाद की आवश्यकता

    संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि सरकार को जवाबदेह बनाने और जनता की आवाज़ उठाने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान है। विपक्ष का दायित्व है कि वह जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाए, वहीं सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन विषयों पर चर्चा से पीछे न हटे। यदि दोनों पक्ष अपनी-अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाएं तो लोकतंत्र और मजबूत होगा।

    दुर्भाग्य से पिछले कुछ वर्षों में संसद की कार्यवाही बार-बार हंगामे की भेंट चढ़ती रही है। शोर-शराबा, नारेबाजी और लगातार स्थगन से न केवल महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं को भी ठेस पहुंचती है। सांसदों को जनता ने बहस करने, सवाल पूछने और समाधान निकालने के लिए चुना है, न कि सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए।

    विधायी कार्य और सहमति का महत्व

    सरकार ने इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी की है। ऐसे में आवश्यक है कि हर विधेयक पर गंभीर चर्चा हो, विपक्ष अपनी आशंकाएं रखे और सरकार उनका संतोषजनक उत्तर दे। बहुमत के आधार पर कानून पारित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान यह है कि निर्णय व्यापक विमर्श और सहमति के वातावरण में लिए जाएं।

    संसद में असहमति लोकतंत्र की शक्ति है, कमजोरी नहीं। लेकिन असहमति यदि संवाद की जगह टकराव का रूप ले ले, तो उसका नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ता है। इसलिए सत्ता पक्ष को विपक्ष की बात सुनने का धैर्य दिखाना होगा और विपक्ष को भी विरोध की राजनीति के साथ-साथ रचनात्मक सहयोग का परिचय देना होगा।

    देश की जनता चाहती है कि संसद चले, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो और जनहित के फैसले समय पर लिए जाएं। मानसून सत्र दोनों पक्षों के लिए एक अवसर है कि वे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर लोकतंत्र की गरिमा और जनता के विश्वास को मजबूत करें। यही संसदीय परंपराओं का सम्मान होगा और यही लोकतंत्र की वास्तविक जीत भी।

    संसदीय गतिरोध के दीर्घकालिक परिणाम

    जब संसद का मानसून सत्र जैसे महत्वपूर्ण सत्र हंगामे की भेंट चढ़ते हैं, तो इसका असर केवल विधायी कार्य पर ही नहीं पड़ता, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचता है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में संसद की उत्पादकता में लगातार गिरावट देखी गई है, जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में व्यवधान पैदा करना अल्पकालिक राजनीतिक लाभ भले दे दे, लेकिन दीर्घकाल में यह मतदाताओं के बीच नकारात्मक धारणा बनाता है। पीआरएस इंडिया की रिपोर्ट्स दर्शाती हैं कि जिन सत्रों में सार्थक चर्चा होती है, उनमें पारित कानूनों की गुणवत्ता और जनस्वीकृति दोनों बेहतर होती है।

    रास्ता आगे: सहमति और संवाद

    इस मानसून सत्र में दोनों पक्षों के पास एक ऐतिहासिक अवसर है कि वे संसदीय मर्यादा को पुनर्स्थापित करें। सरकार को चाहिए कि वह विपक्ष की जायज मांगों के लिए समय आवंटित करे, और विपक्ष को चाहिए कि वह विरोध को रचनात्मक दिशा दे। लोकतंत्र की गरिमा तभी बनी रह सकती है जब असहमति को संवाद का माध्यम बनाया जाए, न कि टकराव का।

    आगामी दिनों में देश के सामने कई ज्वलंत मुद्दे हैं — चाहे वह मणिपुर की स्थिति हो, पेपर लीक के कारण युवाओं का भविष्य हो, या चुनाव आयोग की निष्पक्षता का प्रश्न हो। इन सभी पर संसद में खुली बहस न केवल सरकार को जवाबदेह बनाएगी, बल्कि जनता को भी आश्वस्त करेगी कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है। संसद की सफलता इसी में निहित है कि वह संवाद का मंदिर बने, रणक्षेत्र नहीं।

    मानसून सत्र विपक्ष
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleतुलसी जयंती पर श्री हनुमान रूप-सज्जा प्रतियोगिता, 26 विद्यालयों के 186 विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह
    Next Article संघर्ष: एक महिला अभ्यर्थी की सफलता की अनकही कहानी

    Related Posts

    नफरत और हिंसा की आग: समाज के लिए गंभीर खतरा

    July 21, 2026

    लोकल ट्रेन में बवाल: मुंबई लोकल में मारपीट के आरोप में दो ट्रांसजेंडर गिरफ्तार

    July 21, 2026

    विक्रम-1: नए भारत की अंतरिक्ष उड़ान का स्वर्णिम अध्याय – निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक सफलता

    July 21, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    नफरत और हिंसा की आग: समाज के लिए गंभीर खतरा

    लोकल ट्रेन में बवाल: मुंबई लोकल में मारपीट के आरोप में दो ट्रांसजेंडर गिरफ्तार

    विक्रम-1: नए भारत की अंतरिक्ष उड़ान का स्वर्णिम अध्याय – निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक सफलता

    नफरत और हिंसा की आग: शहर जलाने वालों को चेतावनी, हम सब जलेंगे

    लोकतंत्र में विरोध का अधिकार: संसद मार्च, टकराव और लोकतांत्रिक संतुलन की कसौटी

    मुंबई सेंट्रल GRP ने लोकल ट्रेन में मारपीट करने वाले दो ट्रांसजेंडर को दबोचा

    आवाज बुलंद हो, व्यवस्था बाधित नहीं: लोकतंत्र में विरोध और कानून-व्यवस्था का संतुलन

    विक्रम-1: नए भारत की अंतरिक्ष उड़ान का स्वर्णिम अध्याय – निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक सफलता

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू, शून्य उत्सर्जन की दिशा में बड़ा कदम

    22 अगस्त को होगा हिंदुस्तान मित्र मंडल का श्रावण महोत्सव, पुरानी कमेटी पर फिर जताया गया भरोसा

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.