5 साल से एक्सपायर फिटनेस वाली बस दौड़ रही, एक वाहन का रिकॉर्ड ही गायब
बिना मान्यता के संचालन, डीसी के आदेश को भी किया दरकिनार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा के धर्म डीह में संचालित शेफर्ड इंग्लिश स्कूल में शिक्षा और परिवहन दोनों मोर्चों पर नियम-कानून को ताक पर रखा जा रहा है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहा है और सिर्फ फीस वसूली को प्राथमिकता दे रहा है।
mParivahan पोर्टल और स्थानीय जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उससे अभिभावकों में आक्रोश है।
*खुलासा: एक्सपायर कागजात वाली गाड़ियों में ढोए जा रहे बच्चे*
1. *बस संख्या JH05CB3500*: इस बस की फिटनेस 08 मई 2020 से समाप्त है। यानी 5 वर्ष से अधिक समय से बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के यह बस सड़कों पर दौड़ रही है। वाहन का टैक्स 2030 तक जमा है और बीमा 26 फरवरी 2026 तक वैध बताया जा रहा है।
2. *वाहन संख्या JH06C5308*: mParivahan पर इस वाहन का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पोर्टल पर `Try after some time` का संदेश आ रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह वाहन लगभग 25 वर्ष पुराना है। ऐसे में इसका पंजीयन और बीमा दोनों संदेह के घेरे में हैं।
ये दोनों वाहन प्रतिदिन यूसील कॉलोनी गेट से धर्मडीह तक सैकड़ों बच्चों को लाने-ले जाने का कार्य करते हैं। इसी मार्ग से यूसील महाविद्यालय और परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय के हजारों छात्र भी आवागमन करते हैं। अभिभावकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार बच्चों के गिरकर घायल होने की घटनाएं भी हो चुकी हैं।
*शिक्षा के क्षेत्र में भी अनियमितता*
झारखंड शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बिना मान्यता के किसी भी निजी विद्यालय का संचालन अवैध है। शिकायत में कहा गया है कि शेफर्ड इंग्लिश स्कूल यूसील कॉलोनी में बिना वैध मान्यता के कक्षा 10वीं तक संचालित हो रहा है। 10वीं के बाद के विद्यार्थियों का नामांकन अन्य विद्यालयों के माध्यम से कराकर झारखंड बोर्ड की परीक्षा दिलाई जा रही है, जो बोर्ड नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इसके अतिरिक्त अभिभावकों ने मनमानी फीस वसूली और शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं देने का भी आरोप लगाया है।
*प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना*
जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने वाहनों के कागजात दुरुस्त करें, चालकों का पुलिस सत्यापन कराएं और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें। लेकिन शेफर्ड स्कूल प्रबंधन ने इन आदेशों को भी नजरअंदाज कर दिया।
*भाजपा नेता ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग*
इस पूरे मामले को लेकर भाजपा नेता रोहित सिंह ने उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी और यूसील के सीएमडी को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में अविलंब जांच कर दोषी प्रबंधन पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
रोहित सिंह ने कहा, _”विद्यालय प्रबंधन को केवल धन अर्जन से मतलब है। बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से उन्हें कोई सरोकार नहीं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो एक बड़ी दुर्घटना की आशंका है।”_
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने भी मांग की है कि जब तक दोनों वाहनों के सभी दस्तावेज पूर्ण नहीं हो जाते, तब तक उनके परिचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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*संबंधित बॉक्स: कानून क्या कहता है*
*1. मोटर वाहन अधिनियम 1988*
– *धारा 39*: बिना पंजीयन के वाहन चलाना दंडनीय।
– *धारा 56*: वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना वाहन चलाने पर 5000 रुपये तक जुर्माना, 3 माह तक का कारावास और वाहन जब्ती का प्रावधान।
– *धारा 66*: परमिट के बिना यात्री वाहन का संचालन अवैध।
– *धारा 146*: तृतीय पक्ष बीमा के बिना वाहन चलाना अपराध।
*2. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन व स्कूल बस सुरक्षा मानक*
स्कूल बसों में निम्नलिखित अनिवार्य हैं:
– वैध फिटनेस प्रमाणपत्र
– वैध बीमा
– स्कूल बस का पीला रंग और “SCHOOL BUS” लेखन
– GPS ट्रैकर और CCTV कैमरा
– आपातकालीन द्वार, प्राथमिक चिकित्सा किट, अग्निशामक यंत्र
– महिला परिचारिका की नियुक्ति
– चालक और परिचारक का पुलिस सत्यापन
*3. झारखंड शिक्षा अधिनियम*
बिना मान्यता के विद्यालय संचालित करना दंडनीय है। बोर्ड परीक्षा के लिए फर्जी नामांकन कराना भी नियम विरुद्ध है।
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अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और यूसील प्रबंधन इस शिकायत पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

