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    Home » पोटका में सरकारी जमीन पर भू-माफिया का फिर कब्जा: अंचल कर्मियों की मिलीभगत उजागर, CO की चुप्पी से बढ़े सवाल
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    पोटका में सरकारी जमीन पर भू-माफिया का फिर कब्जा: अंचल कर्मियों की मिलीभगत उजागर, CO की चुप्पी से बढ़े सवाल

    Aman OjhaBy Aman OjhaJuly 5, 2026No Comments4 Mins Read
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    कुलड़ीहा के प्लॉट 213-418 पर दोबारा अतिक्रमण, आरटीआई संघ बोला- सरकारी जमीन बचाना उपायुक्त के लिए बनी चुनौती

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता 

     

    *जादूगोड़ा पोटका अंचल क्षेत्र में सरकारी भूमि को संरक्षित रखना प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है। ताजा मामला पोटका अंचल के कुलड़ीहा मौजा का है, जहां भू-माफियाओं और राजस्व कर्मियों के गठजोड़ ने सरकारी प्लॉट संख्या 213 और 418 पर एक बार फिर अवैध कब्जा जमा लिया है।

     

    गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व तत्कालीन अंचल अधिकारी इम्तियाज अहमद के निर्देश पर इन दोनों प्लॉटों से JCB मशीन चलाकर अतिक्रमण हटवाया गया था। लेकिन प्रशासन की उदासीनता और निगरानी के अभाव में भू-माफिया फिर से सक्रिय हो गए और सरकारी जमीन पर अपना दावा ठोक दिया।

     

    *कागजी खेल से किया सरकारी जमीन पर कब्जा*

    आरटीआई कार्यकर्ता संघ के सचिव सुनील मुर्मू ने राष्ट्र संवाद को बताया कि भू-माफियाओं ने बड़ी ही सोची-समझी साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया है। आरोप है कि उन्होंने रैयती प्लॉट संख्या 204 में फर्जी कागजी खरीद-बिक्री दिखाकर उसकी आड़ में सरकारी प्लॉट 213 और 418 कीमती जमीन पर कब्जा कर लिया।

     

    सुनील मुर्मू ने सीधे तौर पर स्थानीय अंचल निरीक्षक, हल्का कर्मचारी और अमीन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि “इन अधिकारियों-कर्मचारियों की सहमति के बिना एक इंच भी सरकारी जमीन पर कब्जा संभव नहीं है। यह घोर लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है।”

     

    *नोटिस तक सीमित रह गई CO की कार्रवाई*

    इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद वर्तमान अंचल अधिकारी निकिता बाला ने कई अतिक्रमणकारियों को नोटिस निर्गत किया। लेकिन नोटिस के बाद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न कब्जा हटा, न कोई गिरफ्तारी हुई।

     

    सुनील मुर्मू ने सवाल उठाया कि “नोटिस जारी करने के बाद क्या कार्रवाई हुई? फाइल कहां अटकी है? प्रशासन की यह रहस्यमयी चुप्पी भू-माफियाओं को संरक्षण देने जैसा है। इसी कारण आज सरकारी संपत्ति की खुलेआम लूट हो रही है।”

     

    *उपायुक्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती*

    पोटका क्षेत्र खनिज और जमीन के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में सरकारी जमीन पर बार-बार कब्जे की घटना जिला प्रशासन की साख पर बट्टा लगा रही है।

     

    आरटीआई संघ का मानना है कि जिला उपायुक्त के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है कि वे यह साबित करें कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सकती है। यदि अभी भी सख्ती नहीं बरती गई तो आने वाले समय में इस तरह के मामले और बढ़ेंगे।

     

    *आरटीआई संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी*

    इस पूरे प्रकरण को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता संघ ने जिला प्रशासन से 4 सूत्री मांगें की हैं:

     

    1. *उच्च स्तरीय जांच:* पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों को चिन्हित किया जाए

    2. *कड़ी कार्रवाई:* भू-माफियाओं को संरक्षण देने वाले अंचल निरीक्षक, हल्का कर्मचारी और अमीन को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए

    3. *सार्वजनिक रिपोर्ट:* CO द्वारा जारी नोटिस के अनुपालन की स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

    4. *पुनः अतिक्रमण मुक्ति:* सरकारी प्लॉट 213 और 418 को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कराकर वहां सरकारी संपत्ति का बोर्ड स्थापित किया जाए

     

    संघ के सचिव सुनील मुर्मू ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया तो संघ इस भ्रष्टाचार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगा और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।

     

    इस मामले में कुलड़ीहा पंचायत की मुखिया अनिमा सिंह ने भी जिला के अपर समाहर्ता से लिखित शिकायत कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। पंचायत के 78 सदस्यों ने भी इस अवैध कब्जे का विरोध किया है।

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