राष्ट्र संवाद संवाददाता
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की राखा कॉपर माइंस में उत्पादन का काम देख रही साउथ वेस्ट माइनिंग लिमिटेड कंपनी पर गंभीर आरोप लगे हैं। भूतपूर्व कर्मचारी तथा उनके आश्रित संघ ने कंपनी प्रबंधन पर स्थानीय बेरोजगारों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को फायदा पहुंचाने और पर्यावरण नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगाया है।
*चुपके से बांटे जा रहे ठेके, जमशेदपुर के ठेकेदार हावी*
संघ के महासचिव मनोज प्रताप सिंह ने बताया कि HCL ने राखा माइंस खोलने का टेंडर साउथ वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को दिया था। आरोप है कि कंपनी ने टेंडर की शर्तों को दरकिनार कर चुपके से अपने अधीन अन्य कंपनियों को सब-कॉन्ट्रैक्ट बांट दिए। इसका फायदा कंपनी के चहेते लोगों को मिल रहा है।
सबसे ज्यादा विवाद खदान में चल रही गाड़ियों को लेकर है। संघ का दावा है कि माइंस में जितनी भी गाड़ियां चल रही हैं, वे सभी जमशेदपुर के एक ठेकेदार की हैं। इसका सीधा असर स्थानीय रोजगार पर पड़ा है।
*स्थानीय ड्राइवर बेरोजगार, बाहरी चला रहे गाड़ी*
मनोज प्रताप सिंह ने कहा, “राखा, मुसाबनी और आसपास के सैकड़ों ड्राइवर काम के इंतजार में बैठे हैं, लेकिन कंपनी बाहरी लोगों को ‘टेक्निकल’ बताकर चोरी-छुपे काम पर रख रही है। जमशेदपुर के ड्राइवर यहां गाड़ी चला रहे हैं और स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित किया जा रहा है। यह स्थानीय लोगों के साथ धोखा है।”
*चास नाला में बह रहा जहरीला पानी, प्रदूषण पर आंख मूंदे बैठा प्रबंधन*
संघ ने कंपनी पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। आरोप है कि खदान से निकलने वाला दूषित पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे चास नाला में छोड़ा जा रहा है। नियमों के तहत माइंस का पानी शुद्ध करना अनिवार्य है, लेकिन कंपनी खुलेआम लापरवाही बरत रही है। इससे नाले का पानी और आसपास की जमीन जहरीली हो रही है। ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
*”कंपनी चंद चहेतों के इशारे पर चल रही”*
महासचिव मनोज प्रताप सिंह ने कहा कि पूरी कंपनी चंद अपने चहेते लोगों के इशारे पर चल रही है। न तो टेंडर की शर्तों का पालन हो रहा है और न ही स्थानीय हितों का ध्यान रखा जा रहा है। संघ ने HCL प्रबंधन से मांग की है कि नौकरी और सप्लाई के कार्यों में स्थानीय लोगों तथा भूतपूर्व कर्मचारियों के आश्रितों को प्राथमिकता दी जाए।
*15 दिन का अल्टीमेटम, नहीं माने तो होगा आंदोलन*
भूतपूर्व कर्मचारी आश्रित संघ ने प्रबंधन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिनों के अंदर बाहरी लोगों की जगह स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं दिया गया तो मजबूरी में माइंस का गेट जाम कर आंदोलन किया जाएगा।
साथ ही चास नाला में गंदा पानी छोड़ना बंद नहीं हुआ तो पहले झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत की जाएगी।

