राष्ट्र संवाद संवाददाता संजय शर्मा
सरायकेला खरसांवा जिला अंतर्गत चांडिल प्रखंड के आसनबनी पंचायत अंतर्गत फदलोगोड़ा गांव में भूमाफियाओं द्वारा सरकारी और पौराणिक जलस्रोतों पर कब्जा कर ,मिट्टी से भरकर बेचने की कथित साजिश का मामला सामने आने से क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों की शिकायत पर अनुमंडल पदाधिकारी नीतिन शिवम गुप्ता के निर्देश पर शनिवार को चल रहे समतलीकरण कार्य को तत्काल बंद करा दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार जमशेदपुर-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग फदलोगोड़ा टायर मिस्त्री दुकान से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह पौराणिक तालाब और दालमा पहाड़ से आने वाला प्राकृतिक जुड़िया नाला (दालमा जुड़िया) दशकों पुराना है। वर्ष 1958-60 के सेटलमेंट रिकॉर्ड और नक्शों में भी तालाब एवं नाले का उल्लेख दर्ज बताया जा रहा है। यह जलस्रोत वर्षों से ग्रामीणों और मवेशियों की जीवनरेखा रहा है.
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से रात के अंधेरे में हाइवा वाहनों से लगातार मिट्टी गिराकर तालाब और जुड़िया नाले को भरने का काम किया जा रहा था। शनिवार सुबह कथित रूप से भूमि की नापी कर उसे समतल बनाकर बेचने की तैयारी चल रही थी। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए और प्रशासन को अवगत कराया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि दिवंगत समाजसेवी एवं आंदोलनकारी भूतनाथ महतो इस तालाब में मछली पालन करवाते थे तथा उसकी सार्वजनिक डाक होती थी। उनके निधन के बाद संरक्षण के अभाव में भूमाफियाओं की नजर इस ऐतिहासिक जलस्रोत पर पड़ गई।
ग्रामीणों का कहना है कि दालमा जुड़िया नाला काली मंदिर के पास से होकर बस्ती के बीच बहता है और बरसों से जल निकासी का प्रमुख स्रोत रहा है। यदि इसे मिट्टी भरकर समाप्त कर दिया गया तो प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित होगा और भविष्य में जलजमाव तथा पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है। गौरतलब है 1 वर्ष पूर्व भारी बारिश से फड़लोगोड़ा में जल निकाशी के रास्ते बंद होने से बाढ़ आपदा आ गई थी कईयों के घर डूब गए थे.ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था .
ग्रामीणों ने राज्य सरकार के उस निर्देश का हवाला दिया जिसमें पौराणिक तालाबों, नदियों, नालों और प्राकृतिक जलस्रोतों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ पर रोक की बात कही गई है। लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अनुमंडल पदाधिकारी नीतिन शिवम गुप्ता ने बताया कि अंचल कार्यालय द्वारा सरकारी भूमि, जुड़िया नाला एवं तालाब की जांच कराई जाएगी। जांच में अतिक्रमण या अवैध भराई की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फदलोगोड़ा में सामने आया यह मामला न केवल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का है, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक जलस्रोतों के अस्तित्व पर भी बड़ा खतरा माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

