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    Home » राखा कॉपर प्लांट विस्तार पर बवाल: पेड़ कटाई से भड़के ग्रामीण, ग्रामसभा ने रुकवाया काम
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    राखा कॉपर प्लांट विस्तार पर बवाल: पेड़ कटाई से भड़के ग्रामीण, ग्रामसभा ने रुकवाया काम

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarJune 4, 2026No Comments4 Mins Read
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    राखा कॉपर प्लांट विस्तार पर बवाल: पेड़ कटाई से भड़के ग्रामीण, ग्रामसभा ने रुकवाया काम

    बिना ग्रामसभा अनुमति पेड़ काटने का आरोप, प्रमुख ने दी आंदोलन की चेतावनी
    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जादूगोड़ा:जादूगोड़ा स्थित राखा कॉपर प्लांट का विस्तार कार्य शुरू होते ही विवादों में घिर गया है। फॉरेस्ट लैंड से सटे अधिग्रहित क्षेत्र में पोकलेन मशीन से जमीन समतल करने के दौरान दर्जनों हरे-भरे पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों के विरोध के बाद ग्रामसभा ने हस्तक्षेप करते हुए कार्य को रुकवा दिया।

    मौके पर पहुंचे मुसाबनी प्रमुख, काम कराया बंद

    पेड़ कटाई की सूचना मिलते ही मुसाबनी प्रमुख रामदेव हेम्ब्रम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और कार्य बंद कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्र रूआम ग्रामसभा के अंतर्गत आता है और ग्रामसभा की अनुमति के बिना पेड़ काटना कानून का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी पहले भी क्षेत्र के जल स्रोतों को प्रदूषित कर चुकी है और अब जंगलों को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी जारी रही तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे।

    ग्रामसभा की आपात बैठक में पारित हुआ निंदा प्रस्ताव

    घटना के बाद बड़ा रूआम गांव में ग्राम प्रधान बलराम माडी की अध्यक्षता में आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में पेड़ कटाई की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कंपनी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी मनमाने तरीके से कार्य कर रही है। बैठक में साईबा हेम्ब्रम, हाड़ी राम सोरेन, फंडा मुर्मू, सिकंदर हो, रघुनाथ हांसदा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

    कंपनी बोली- सभी आवश्यक मंजूरियां ली गई हैं

    वहीं कंपनी प्रबंधन ने ग्रामसभा के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी के अधिकारी अभय पांडेय ने कहा कि अधिग्रहित भूमि पर कार्य के लिए ग्रामसभा की अनुमति आवश्यक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वन विभाग तथा रांची मुख्यालय से सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर ली गई हैं और नियमानुसार कार्य किया जा रहा है।

    25 साल बाद शुरू होगी माइंस, रोजगार की उम्मीद

    कंपनी के अनुसार लगभग 25 वर्षों से बंद पड़ी माइंस को दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है। अगले वर्ष से तांबा अयस्क उत्पादन शुरू होने की संभावना है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। कंपनी ने यह भी दावा किया कि कटे हुए पेड़ों के बदले बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है तथा 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा।

    पुराने आरोपों के बीच नया विवाद

    गौरतलब है कि एचसीएल की राखा कॉपर परियोजना का विस्तार साउथ वेस्ट माइनिंग लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। भूमिगत खदानों के आधुनिकीकरण और डिकलाइन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि विस्तार परियोजना के नाम पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की जा रही है। कंपनी पर पहले भी क्षेत्र के जल स्रोतों को प्रदूषित करने के आरोप लग चुके हैं।

    टकराव की स्थिति, आगे क्या होगा?

    एक ओर ग्रामसभा बिना अनुमति हुए कार्य को बंद कराने पर अड़ी हुई है, वहीं कंपनी सभी वैधानिक मंजूरियों का दावा कर रही है। ऐसे में 25 वर्ष बाद पुनः शुरू होने जा रही यह महत्वाकांक्षी खनन परियोजना फिलहाल ग्रामीणों और कंपनी के बीच टकराव का केंद्र बन गई है।

    बिना ग्राम सभा की मंजूरी के अब जंगल में पत्ता भी नहीं हिलेगा, FRA 2006 बना आदिवासियों का सुरक्षा कवचअब किसी भी कंपनी या सरकारी विभाग को जंगल की जमीन चाहिए तो पहले गांव के लोगों की चौखट पर जाना पड़ेगा।

    वन अधिकार अधिनियम, 2006 ने जंगलों के प्रबंधन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। कानून साफ कहता है कि किसी भी वन भूमि पर पेड़ों की कटाई या सड़क, खनन जैसी गैर-वानिकी गतिविधि के लिए ग्राम सभा की लिखित अनुमति यानी NOC लेना अनिवार्य होगा।

     

     

    ग्रामसभा ने रुकवाया काम राखा कॉपर प्लांट विस्तार पर बवाल: पेड़ कटाई से भड़के ग्रामीण
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