Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » UCIL में ‘सब ठीक’ या बड़ा खेल? उत्पादन में गिरावट, गुटबाजी और प्रबंधन पर उठे सवाल
    Breaking News Headlines कारोबार खबरें राज्य से चाईबासा जमशेदपुर झारखंड सरायकेला-खरसावां हजारीबाग

    UCIL में ‘सब ठीक’ या बड़ा खेल? उत्पादन में गिरावट, गुटबाजी और प्रबंधन पर उठे सवाल

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarJune 2, 2026No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    UCIL में ‘सब ठीक’ या बड़ा खेल? उत्पादन में गिरावट, गुटबाजी और प्रबंधन पर उठे सवाल

    20 साल से जमे अफसर, जूनियरों को प्रमोशन के आरोप; औद्योगिक अशांति से घिरी जादूगोड़ा परियोजना

    राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता जादूगोड़ा:यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के जादूगोड़ा प्रोजेक्ट में उत्पादन में लगातार गिरावट को लेकर प्रबंधन की कार्यशैली, प्रशासनिक गुटबाजी और ट्रांसफर नीति के पालन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कंपनी से जुड़े सूत्रों और श्रमिक संगठनों का आरोप है कि नेतृत्व स्तर पर समन्वय की कमी तथा आंतरिक खींचतान का सीधा असर उत्पादन और औद्योगिक माहौल पर पड़ रहा है।
    सूत्रों के अनुसार, पूर्व प्रभारी CMD डॉ. एस.के. सतपति और वर्तमान CMD डॉ. कंचम आनंद राव का अनुभव मुख्य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में रहा है। आलोचकों का कहना है कि बड़े औद्योगिक उपक्रम के संचालन, प्रशासनिक प्रबंधन और जनसंपर्क के क्षेत्र में अनुभव की कमी के कारण उत्पादन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
    जानकारों का दावा है कि पूर्व CMD रमेंद्र गुप्ता, दिवाकर आचार्य और डॉ. सी.के. असनानी के कार्यकाल में उत्पादन बेहतर स्तर पर था। उस समय श्रमिक संगठनों, स्थानीय लोगों और प्रबंधन के बीच बेहतर संवाद बना हुआ था, जिससे कई जटिल परिस्थितियों का भी समाधान निकल जाता था।
    वर्तमान व्यवस्था को लेकर आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों की अपेक्षा कुछ जूनियर अधिकारियों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। इससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा है और कार्य संस्कृति प्रभावित हुई है। वहीं, विस्थापितों के आंदोलनों और बार-बार होने वाली हड़तालों को लेकर भी प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
    कंपनी की ट्रांसफर एवं रोटेशन नीति को लेकर भी कर्मचारियों के बीच नाराजगी बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ अधिकारी दो दशक से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों का नियमित तबादला किया जा रहा है। विशेष रूप से परचेज और लेखा विभाग में वर्षों से पदस्थापना को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
    औद्योगिक अशांति के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी असंतुष्ट हैं और इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
    श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही है और कई बार जोखिम भरे माहौल में काम करना पड़ता है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि उच्च अधिकारी और शीर्ष प्रबंधन द्वारा खदानों का नियमित निरीक्षण नहीं किए जाने से उत्पादन और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
    भाजपा नेता मनोज प्रताप सिंह भी समय-समय पर UCIL प्रबंधन और CMD की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कंपनी में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग की है। वहीं, तुरामडीह माइंस में हुई हड़ताल को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग श्रमिक संगठनों द्वारा की जा रही है।

    UCIL को लेकर उठ रहे प्रमुख सवाल

    उत्पादन में लगातार गिरावट की वजह क्या है?

    क्या ट्रांसफर और रोटेशन नीति का समान रूप से पालन हो रहा है?

    वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका क्यों सीमित होने के आरोप लग रहे हैं?

    बार-बार हो रही हड़तालों के पीछे आखिर कारण क्या हैं?

    श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने में कमी क्यों?

    क्या औद्योगिक अशांति का असर उत्पादन पर पड़ रहा है?

    प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच संवाद की स्थिति क्या है?

    क्या आरोपों और विवादों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है?

    UCIL में ‘सब ठीक’ या बड़ा खेल? उत्पादन में गिरावट गुटबाजी और प्रबंधन पर उठे सवाल
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleरंगदारी नहीं देने पर जदयू नेता को मारी गोली, पैर में लगी, सिर को छूकर निकली दूसरी छू कर निकली
    Next Article झारखंड: राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग की चर्चा फिर गर्म

    Related Posts

    विष्णू नाथ तिवारी को पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष नियुक्त

    July 20, 2026

    नीट परीक्षा लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाकपा का केंद्र सरकार पर हमला

    July 20, 2026

    गोलमुरी मार्केट की पान दुकान में चोरी, नकदी समेत हजारों रुपये का सामान ले उड़े चोर

    July 20, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    विष्णू नाथ तिवारी को पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष नियुक्त

    नीट परीक्षा लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाकपा का केंद्र सरकार पर हमला

    गोलमुरी मार्केट की पान दुकान में चोरी, नकदी समेत हजारों रुपये का सामान ले उड़े चोर

    आरएसबी ग्रुप ने मनाया ‘एक पहल’ वार्षिक उत्सव का चौथा संस्करण – सपनों से आगे के भविष्य का संकल्प

    गोलमुरी में चोरी की वारदातों पर भाजपा का कड़ा रुख, अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी और रात्रि गश्ती बढ़ाने की मांग : दिनेश कुमार

    सावन से पहले आषाढ़ी पूजा संपन्न, सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना

    नौकरी की मांग को लेकर बोकारो जनरल अस्पताल में हंगामा।

    अफवाहें जंगल की आग: सोशल मीडिया पर झूठ का प्रसार और हमारी जिम्मेदारी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यूरोप के तीन देशों की ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना

    अफवाहें जंगल की आग की तरह फैलती हैं: सच जानने के 3 जरूरी मंत्र

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.