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    Home » हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों की हुंकार: “सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता का धर्म
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    हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों की हुंकार: “सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता का धर्म

    Sumi BangabashBy Sumi BangabashJune 1, 2026No Comments4 Mins Read
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    हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों की हुंकार: “सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता का धर्म

     राष्ट्र संवाद संवादाता 

    समाचार क्यारी मुख्यालय में हुई पत्रकारिता की दशा और दिशा पर मंथन, वरिष्ठ पत्रकारों ने रखे बेबाक विचार
    पंचकूला। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर समाचार क्यारी मीडिया समूह के मुख्यालय में एक भव्य संगोष्ठी एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला शक्ति प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों, लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका, पत्रकारों की सुरक्षा, निष्पक्ष पत्रकारिता तथा बदलते मीडिया परिदृश्य पर गंभीर चर्चा हुई।

    कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र के प्रति एक जिम्मेदारी है। आज के दौर में पत्रकारों को दबाव, प्रलोभन और विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद पत्रकारिता की मूल आत्मा को जीवित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    “सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता है” : राजेश कुमार

    समाचार क्यारी मीडिया समूह के मुख्य संपादक एवं समूह संपादक राजेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य जनता और सत्ता के बीच जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि “सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता है। जो पत्रकार सवाल पूछना छोड़ देता है, वह लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी से दूर हो जाता है।”

    उन्होंने कहा कि पत्रकारिता कोई आसान रास्ता नहीं है। यह “घर फूंक तमाशा” की तरह है, जहां पत्रकार को हर समय जोखिम उठाने के लिए तैयार रहना पड़ता है। उन्होंने पत्रकारों से आह्वान किया कि वे पहले से तैयार प्रेस नोटों और औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंसों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर सच को सामने लाने का कार्य करें।

    राजेश कुमार ने कहा कि पत्रकारों को अपनी जाति, क्षेत्र, व्यक्तिगत विचारधारा या किसी राजनीतिक दल के प्रभाव से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाचार में पत्रकार की निजी पसंद-नापसंद नहीं, बल्कि तथ्य और सत्य दिखाई देने चाहिए।

    पत्रकारों की एकता ही सबसे बड़ी ताकत : विनोद शर्मा

    वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया के ट्राईसिटी अध्यक्ष विनोद शर्मा ने कहा कि पत्रकारों को संगठित होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारों के सामने रोजगार, सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े अनेक प्रश्न खड़े हैं, जिनका समाधान केवल एकता के माध्यम से ही संभव है।

    उन्होंने कहा कि पत्रकारों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिशें लोकतंत्र के लिए भी नुकसानदायक हैं। पत्रकार समाज का आईना है और यदि आईना ही कमजोर हो जाएगा तो समाज की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने युवा पत्रकारों से वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभवों से सीखने का आग्रह किया।

    पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे बड़ी पूंजी : पी.पी. वर्मा

    वरिष्ठ पत्रकार पी.पी. वर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में समाचारों की गति बढ़ी है, लेकिन इसके साथ-साथ फेक न्यूज और अपुष्ट सूचनाओं का खतरा भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि किसी भी पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विश्वसनीयता होती है।

    उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सबसे पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए और फिर समाचार प्रकाशित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की दौड़ में कई बार सत्य पीछे छूट जाता है, जो पत्रकारिता के लिए चिंता का विषय है।

    पी.पी. वर्मा ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना भी है। इसलिए पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए कार्य करना चाहिए।

    पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ही नहीं, उसकी आत्मा भी है : संजय शर्मा

    वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ही नहीं, बल्कि उसकी आत्मा भी है। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज में अन्याय, भ्रष्टाचार और शोषण बढ़ा है, तब-तब पत्रकारों ने अपनी कलम के माध्यम से जनता की आवाज को बुलंद किया है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सच्ची पत्रकारिता वही है जो दबावों के आगे झुके नहीं। उन्होंने युवा पत्रकारों को निष्पक्षता, धैर्य और सत्यनिष्ठा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।

    पत्रकारिता की दशा और दिशा पर हुआ मंथन

    कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने पत्रकारों की सुरक्षा, मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी, पत्रकारों के अधिकार, डिजिटल मीडिया की चुनौतियां, समाचारों की निष्पक्षता और पत्रकारिता की विश्वसनीयता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

    इस अवसर पर राजीव गुप्ता, विक्रांत शर्मा, हरपाल सिंह, करुणा मित्तल, अनिल कुमार, आनंद कुमार, ललित कुमार, ओम प्रकाश, हंसराज, श्रीराम, सुधीर सिंह, अशोक वर्मा, हिमांशु शर्मा, मनप्रीत कौर, डॉ. हेमलता शर्मा, उषा गर्ग, नीलम त्रिखा सहित अनेक पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार रखे और हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को नमन किया।

    कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया तथा लोकतंत्र की रक्षा में पत्रकारों की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

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