तुरामडीह माइंस में अवैध वसूली पर लगेगी रोक, कथित अवैध भवन हटाने की तैयारी
ग्रामसभा की मांगों पर यूसीआईएल प्रबंधन से वार्ता, विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने का आश्वासन
‘राष्ट्र संवाद’ की खबर के बाद तेज हुई कार्रवाई की मांग
राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
जादूगोड़ा।तुरामडीह ग्रामसभा द्वारा यूसीआईएल प्रबंधन को सौंपे गए मांग पत्र के बाद गुरुवार को जादूगोड़ा स्थित यूसीआईएल कार्यालय में उप महाप्रबंधक (कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध) राकेश कुमार की अध्यक्षता में द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। बैठक में ग्रामसभा प्रतिनिधियों, विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के सदस्यों तथा यूसीआईएल अधिकारियों ने भाग लिया। वार्ता का नेतृत्व मजदूर नेता बाघराय मार्डी ने किया।
ग्रामसभा की ओर से दिए गए मांग पत्र में आरोप लगाया गया था कि गांव के आठ विस्थापित एवं प्रभावित ठेका मजदूरों को बिना किसी स्पष्ट कारण के काम से बैठा दिया गया है। इसके साथ ही मजदूरों की दैनिक मजदूरी से 50 रुपये की कथित अवैध वसूली किए जाने का आरोप पिंटू चकिया उर्फ मिंटू चकिया पर लगाया गया था। इस मुद्दे को लेकर ग्रामसभा ने कड़ा विरोध जताते हुए शीघ्र समाधान की मांग की थी।
ग्रामसभा ने अपने मांग पत्र में काम से हटाए गए मजदूरों को पुनः कार्य पर रखने, विस्थापित परिवारों को स्थायी नौकरी देने, मृतक एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आश्रितों को रोजगार उपलब्ध कराने, अवैध वसूली की जांच कराने तथा तुरामडीह माइंस गेट के सामने बने कथित अवैध कार्यालय को हटाने की मांग उठाई। इसके अलावा स्वच्छ पेयजल, नियमित मेडिकल कैंप, पाइपलाइन व्यवस्था में सुधार तथा टेलिंग डैम से प्रभावित खेतों और जलस्रोतों के लिए उचित मुआवजा देने की मांग भी रखी गई।
वार्ता के बाद जारी कार्यवाही विवरण में यूसीआईएल प्रबंधन ने कई मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। प्रबंधन ने कहा कि काम से बैठाए गए मजदूरों के मामले की जांच कर आगामी सोमवार तक उन्हें पुनः कार्य पर रखने की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में विस्थापन और रोजगार से जुड़े लंबित मामलों को मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव स्तर पर उठाकर एक माह के भीतर समाधान की दिशा में पहल करने की बात भी कही गई। साथ ही बिना अनुमति कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने वाले कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया सात दिनों के भीतर पूरी करने का निर्णय लिया गया।
मजदूरों से कथित अवैध वसूली के आरोपों की जांच कराने की मांग पर भी प्रबंधन ने सहमति जताई। वहीं माइंस गेट के सामने स्थित संरचना को लेकर जिला प्रशासन से मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कराए जाने तथा उनके निर्देशानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए उसे हटाने पर भी सहमति बनी।
वार्ता के दौरान विस्थापितों ने यह मुद्दा भी उठाया कि माइंस में गैर-विस्थापित एवं गैर-प्रभावित लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। इस पर प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि भविष्य में संविदा कर्मियों की नियुक्ति ग्राम प्रधान के सत्यापन और पहचान के आधार पर की जाएगी तथा विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यूसीआईएल प्रबंधन ने अपरेंटिसशिप एक्ट के तहत भी विस्थापित एवं प्रभावित युवाओं को प्राथमिकता देने तथा गांव में मेडिकल कैंप की संख्या बढ़ाने एवं पेयजल संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र कदम उठाने की बात कही।
बैठक में यूसीआईएल की ओर से राकेश कुमार, संजीव रंजन एवं गिरीश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
‘राष्ट्र संवाद’ की खबर के बाद तेज हुई कार्रवाई की मांग
तुरामडीह माइंस में मजदूरों से कथित अवैध वसूली, विस्थापितों की उपेक्षा और माइंस गेट के सामने बने कथित अवैध कार्यालय के मुद्दे को लेकर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर असंतोष बना हुआ था। इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद ग्रामसभा ने एकजुट होकर यूसीआईएल प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा। गुरुवार को हुई वार्ता में अवैध वसूली के आरोपों की जांच और विवादित संरचना को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हटाने पर सहमति बनने को विस्थापितों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। मजदूर नेता बाघराय मार्डी ने कहा कि विस्थापितों के अधिकारों और रोजगार के सवाल पर आंदोलन जारी रहेगा तथा आश्वासनों के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखी जाएगी।

