लेखक: इंद्र यादव
कानपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। ITBP कमांडो विकास सिंह ने आरोप लगाया कि टाटमिल चौराहा स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में इलाज के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से उनकी मां निर्मला देवी के हाथ में संक्रमण फैल गया, जिसके बाद डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा।
पीड़ित जवान अपनी मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं होने से मामला और गरमा गया। पुलिस द्वारा जांच CMO को सौंपे जाने के बाद गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में किसी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं की गई, जिससे नाराज होकर ITBP के 40 से 50 जवान कमिश्नरेट परिसर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया।
करीब एक घंटे तक चले तनावपूर्ण माहौल के बाद पुलिस कमिश्नर, CMO और अन्य अधिकारियों के बीच बैठक हुई। बढ़ते दबाव को देखते हुए मामले में दोबारा निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं।
घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, जांच समितियों की निष्क्रियता और आम नागरिकों को न्याय मिलने में होने वाली देरी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि जब एक जवान को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम आदमी की स्थिति कितनी कठिन हो सकती है।

