राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड में अवैध बालू कारोबारियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को भी ठेंगा दिखाने लगे हैं। अंचल अधिकारी दीपक प्रसाद द्वारा जप्त किया गया करीब 8 हजार सीएफटी अवैध बालू बीती रात रहस्यमय तरीके से गायब कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार 12 मई 2026 को ईचागढ़ अंचल अधिकारी दीपक प्रसाद ने उत्क्रमित विद्यालय पुरानडीह , परिसर से सटे परती भूमि पर अवैध रूप से भंडारित लगभग 8 हजार सीएफटी बालू को जप्त किया था। यह कार्रवाई ग्रामीणों की सूचना पर की गई थी। जप्त बालू को अग्रेतर कार्रवाई के लिए ईचागढ़ थाना प्रभारी बजरंग महतो को सौंप दिया गया था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि थाना की निगरानी में रखा गया बालू बीती रात बड़ी मात्रा में गायब हो गया। ग्रामीणों ने सुबह स्थल पर ट्रैक्टरों के ताजा टायर के निशान देखे। अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 5 हजार सीएफटी बालू रातभर में उठाकर ले जाया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में जिस सिंडिकेट द्वारा बालू का भंडारण किया गया था, उन्हीं लोगों के ट्रैक्टरों से बालू हटाया गया। ग्रामीणों ने फूलचंद महतो, जवाहर लाल प्रमाणिक, चंडी यादव, मिहिर मंडल और गुड्डू का नाम लिया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बालू प्रशासन द्वारा जप्त था और उसकी जिम्मेदारी थाना की थी, तो आखिर इतनी बड़ी मात्रा में बालू रातों-रात कैसे गायब हो गया? क्या पुलिस को भनक तक नहीं लगी? या फिर सब कुछ मिलीभगत से हुआ?
इस मामले में जब अंचल अधिकारी दीपक प्रसाद से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें बालू चोरी की जानकारी नहीं है तथा जप्त सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होती है। वहीं चोरी के संबंध में पूछे जाने पर उनका जवाब था — “देखते हैं।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि ईचागढ़ में अवैध बालू कारोबारियों का सिंडिकेट इतना मजबूत हो चुका है कि प्रशासनिक कार्रवाई भी बेअसर साबित हो रही है। सुवर्णरेखा नदी घाटों से दिन-रात अवैध बालू उठाव, डंपिंग और भारी वाहनों से सप्लाई धड़ल्ले से जारी है। लोगों का आरोप है कि इलाके में पुलिस का भय पूरी तरह खत्म हो चुका है।
गौरतल पूर्व में भी जप्त अवैध बालू भंडार से चोरी का मामला सामने आया था। अब एक बार फिर वैसी ही घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि जिले में नए पुलिस अधीक्षक के पदभार संभालने के बाद अवैध बालू कारोबार पर कुछ हद तक लगाम लगी थी, लेकिन उनके छुट्टी पर जाने की खबर के बाद बालू माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं। अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि प्रशासन द्वारा जप्त बालू भी सुरक्षित नहीं रह पा रहा।
ईचागढ़ में आखिर कानून का राज चल रहा है या बालू माफियाओं की समानांतर सरकार — यह सवाल अब आम लोगों की जुबान पर चर्चा में ?

