राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में संथाली भाषा के लिए ओल चिकि लिपि को मान्यता नहीं देने के मुद्दे पर नाराजगी सामने आई है। आदिम डेवलपमेंट सोसायटी, झारखंड के सचिव बाबु राम सोरेन ने शुक्रवार को चांडिल में प्रेस वार्ता के दौरान इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल 2026 को प्रकाशित एक खबर में यह उल्लेख किया गया है कि 2026 में होने वाली जेटेट परीक्षा में संथाली भाषा की परीक्षा देवनागरी लिपि में ली जाएगी। इस फैसले को उन्होंने संथाली भाषा और उसकी मूल लिपि के साथ अन्याय बताया।
बाबु राम सोरेन ने कहा कि संथाली भाषा की अपनी विशिष्ट लिपि ओल चिकि है, जिसका आविष्कार वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने किया था। यह लिपि भारत सरकार द्वारा यूनिकोड में भी शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में भारत का संविधान भी ओल चिकि लिपि में प्रकाशित किया गया है, जिसका विमोचन महामहिम राष्ट्रपति द्वारा किया गया, जो पूरे देश के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि नियमावली में संशोधन कर संथाली भाषा के प्रश्नपत्र ओल चिकि लिपि में ही तैयार किए जाएं और जेटेट में इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। अन्यथा संथाली शिक्षक और छात्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

