राष्ट्र संवाद संवाददाता
यूसीआईएल के जादूगोड़ा इकाई में कैंटीन टेंडर प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस संबंध में भाजपा जिला सचिव रोहित सिंह परमार ने यूसिल सी एम डी सहित सक्षम प्राधिकारी को शिकायत पत्र सौंपते हुए टेंडर में शामिल एक फर्म द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि एम/एस जमुना फैमिली एंटरप्राइजेज द्वारा दिए गए अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज संदिग्ध हैं, साथ ही टेंडर सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही बरती गई है। शिकायत के अनुसार, संबंधित फर्म ने अपना अनुभव एम/एस डीप एंटरप्राइजेज द्वारा जारी दस्तावेजों के आधार पर दिखाया है, जिसमें वर्ष 2019 से 2022 तक करीब ₹1.03 करोड़ के कैटरिंग कार्य का दावा किया गया है।जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दीप एंटरप्राइजेज मुख्य रूप से निर्माण सामग्री और भारी मशीनरी जेसीबी, ट्रैक्टर आदि से जुड़े कार्य करती है, न कि कैटरिंग सेवाओं से। ऐसे में समान प्रकृति के कार्य की अनिवार्य शर्त पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्क ऑर्डर में भुगतान कैश या चेक के माध्यम से करने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 1 करोड़ से अधिक के अनुबंध में नकद भुगतान का उल्लेख आयकर अधिनियम की धारा 269ST का सीधा उल्लंघन है, जिसमें 2 लाख से अधिक नकद लेन-देन प्रतिबंधित है। सबसे गंभीर आरोप FSSAI लाइसेंस को लेकर है। दस्तावेजों के अनुसार, फर्म का FSSAI रजिस्ट्रेशन 08 अगस्त 2024 का है, जबकि अनुभव 2019–2022 का बताया गया है। ऐसे में बिना वैध लाइसेंस के उस अवधि में कैटरिंग कार्य करना कानूनन संभव नहीं है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इतने बड़े अनुबंध के लिए जरूरी वित्तीय और वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, जैसे:
GST रिटर्न (GSTR-1, GSTR-3B)टैक्स चालान और बिल, टीडीएस दस्तावेज,बैंक स्टेटमेंट श्रम कानून (इ एस आई /पी एफ ) रिकॉर्ड। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहले जो सत्यापन किया गया, वह केवल संबंधित फर्म से अनौपचारिक पुष्टि के आधार पर किया गया, जो सार्वजनिक खरीद के मानकों के अनुरूप नहीं है। पत्र में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच हो। सभी वित्तीय और वैधानिक रिकॉर्ड की जांच की जाए। गड़बड़ी पाए जाने पर फर्म को अयोग्य घोषित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही, पहले हुए सत्यापन में हुई लापरवाही की भी जांच हो। चूंकि यह टेंडर गवर्नमेंट इ -मार्केटप्लेस (जीईएम ) के माध्यम से जारी हुआ है, इसलिए मामले की जांच GeM स्तर पर भी कराने की मांग की गई है।यूसीआईएल जैसे संवेदनशील सार्वजनिक उपक्रम में टेंडर प्रक्रिया पर उठे ये सवाल न केवल पारदर्शिता बल्कि जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। अब देखना होगा

