राष्ट्र संवाद संवाददाता
ग़म्हरिया।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में बाल अधिकार एवं संरक्षण पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन प्राचार्य सह जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा एवं अतिथियों ने दीप जलाकर किया। इस अवसर पर प्राचार्य मिश्रा ने कहा कि शिक्षा के विकास में शिक्षकों का अमूल्य योगदान है। विद्यालय में बच्चों को स्वस्थ माहौल प्रदान करने में शिक्षकों की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में अवश्य बताएं, ताकि बच्चे भावी समस्याओं के प्रति जागरूक हो सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना चाहिए, ताकि बच्चे अपनी समस्याओं पर शिक्षक से खुलकर बातें कर सके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बाल संरक्षण पदाधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि बच्चों को चार बाल अधिकार दिए गए हैं। उसमें जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सह भागिता का अधिकार और सुरक्षा का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इन अधिकारों से बच्चों को अवगत कराना शिक्षक की जिम्मेदारी होती है। सब इंस्पेक्टर अरुण सिंह ने बताया कि किसी बच्चे के साथ अगर कोई अपराध होता है, उसे जानकर छिपाना भी अपराध की श्रेणी में आता है। नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर एकता प्रियदर्शी ने बताया कि पोक्सो एक्ट से बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत से नियम बताए गए हैं, पर वह तभी वास्तविक धरातल पर कारगर होंगे, जब बच्चों को अपने अधिकार की जानकारी होगी। विद्यालय स्वस्थ एवं कल्याण कार्यक्रम के जिला कॉऑर्डिनेटर श्रवण कुमार ने विद्यालय स्तर पर बाल संरक्षण एवं सुरक्षा पर जानकारी दी। कार्यशाला में जिले भर के कुल 176 शिक्षकों की सहभागिता रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के संकाय सदस्य-सह -प्रभारी प्राचार्य पंकज कुमार, आर लक्ष्मण राव, डॉ मनीला कुमारी, श्रीमती अनुभा सिंह, श्रीमती सीमा कुमारी, प्रभात कुमार मांझी, राजकिशोर कुम्भकार, राजकिशोर महतो, जवाहर राम समेत अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

