पश्चिम एशिया के संकट का समाधान कूटनीति से ही संभव, सरकार निपटने के लिए पूरी तरह तैयार: मोदी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए अप्रत्याशित संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है जिससे निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए यह भी कहा कि इस संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है और इसका सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा।
उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है तथा भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में सरकार की तैयारियों के कारण आज हालात से निपटने में मदद मिल रही है।
प्रधानमंत्री ने सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘सरकार संवेदनशील है, सतर्क है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है।’’
उन्होंने कहा कि कुछ तत्व ऐसे संकट में गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं, इसलिए कानून व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों को सतर्क रखा गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस युद्ध के कारण दुनिया में बने हालात का प्रभाव लंबे समय तक रहने की आशंका है। इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है। धीरज, संयम और शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है।’’
मोदी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, गैस और उर्वरक से लदे जहाजों के आवागमन में चुनौती के बावजूद सरकार का प्रयास देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बहुत अधिक प्रभावित नहीं होने देने का है।
उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और पेट्रोल-डीजल की लगातार सुचारू आपूर्ति पर काम किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के हालात ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं जो आर्थिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सुरक्षा से जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज में संदेश दुनिया में जाए।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति बनने के बाद उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के अधिकतर राष्ट्राध्यक्षों से दो बार फोन पर बात की है और उन सभी ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है।
मोदी ने कहा कि प्रभावित देशों में भारत के जितने भी मिशन हैं वे निरंतर भारतीयों की मदद में जुटे हैं, वहां काम करने वाले भारतीयों, पर्यटकों को हर संभव मदद दी जा रही है।
मोदी ने कहा, ‘‘युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक लगभग एक हजार भारतीय सुरक्षित वापस आए हैं। इनमें मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 700 से अधिक युवा हैं।’’
उन्होंने कहा कि आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है, वहीं 65 लाख टन से अधिक भंडारण पर काम किया जा रहा है।
मोदी ने कहा, ‘‘सरकार का प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की आपूर्ति होती रहे। हम अपने सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं ताकि हमारे समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें।’’
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधन पर हो रहे कार्यों से भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था के आधारभूत क्षेत्र मजबूत हैं और इससे भी इस संकट के समय में मदद मिली है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि सरकार और उद्योगों के साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज देश में किसानों ने अन्न भंडार भर रखे हैं। हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न हैं। प्रयास है कि खरीफ मौसम की सही से बुवाई हो। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आने वाले गर्मी के मौसम को देखते हुए बिजली की मांग बढ़ने की चुनौती रहेगी, लेकिन देश में फिलहाल सभी बिजली यंयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार पर्याप्त हैं।
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार के कदमों ने भी उसकी तैयारियों में मदद की है।
मोदी ने कहा, ‘‘हमारी कुल अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। बीते 11 वर्ष में सौर ऊर्जा उत्पादन करीब तीन गीगावाट से 140 गीगावाट तक पहुंचा गया है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने भविष्य की तैयारी बढ़ाते हुए परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक कूटनीति की बात है, भारत की भूमिका स्पष्ट है। शुरुआत से हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यत की है। मैंने स्वयं पश्चिम एशिया के संबंधित नेताओं से बात की है। उनसे तनाव कम करने और संघर्ष खत्म करने का आग्रह किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘होर्मुज में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमला अस्वीकार्य है। भारत इस हालात में युद्ध के माहौल में कूटनीति के जरिए भारतीय जहाजों के निरंतर आवागमन के लिए प्रयासरत है। भारत मानवता के हित में और शांति के पक्ष में हमेशा आवाज उठाता रहा है। मैं फिर कहूंगा कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है।’’
मोदी ने कहा कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है।

