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    Home » तृणमूल के चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों को प्रमुखता मिली
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    तृणमूल के चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों को प्रमुखता मिली

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMarch 20, 2026No Comments5 Mins Read
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    तृणमूल के चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों को प्रमुखता मिली

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    कोलकाता 20 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के 2026 के चुनावी घोषणापत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनौती को कमजोर करने और लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करने के प्रयास के तहत महिलाओं, अल्पसंख्यकों एवं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित किया गया है। पिछले 15 वर्षों में ममता बनर्जी के राजनीतिक वर्चस्व को मजबूती प्रदान करने वाले इस सामाजिक वोटबैंक पर पार्टी ने एक बार फिर अपना ध्यान केंद्रित किया है।

    इस घोषणापत्र में 10 ‘‘प्रतिज्ञाओं’’ के साथ कल्याणकारी विस्तार, अल्पसंख्यकों तक पहुंच और आदिवासियों को लक्ष्य कर शुरू की गई पहलों को भी शामिल किया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह राजनीतिक मिश्रण उस चुनावी गणित को दर्शाता है जिसने 2011 में वाम मोर्चा के 34 साल के शासन को समाप्त करने के बाद से तृणमूल कांग्रेस को बार-बार जीत दिलाई है।

    घोषणापत्र के केंद्र में लक्ष्मीर भंडार योजना है, जिसे व्यापक रूप से सत्तारूढ़ पार्टी का राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावी कल्याणकारी कार्यक्रम माना जाता है।

    बनर्जी ने योजना में 500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए मासिक सहायता बढ़कर 1,700 रुपये और सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए 1,500 रुपये हो गई।

    तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ‘‘लक्ष्मीर भंडार में बढ़ोतरी सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं है बल्कि यह एक राजनीतिक संकेत है। महिला मतदाता लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़ी रही हैं और पार्टी उस भरोसे को और मजबूत करना चाहती है।’’

    वित्तीय सहायता के अलावा घोषणापत्र में रोजगार के अवसरों का विस्तार करके, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करके और स्वयं सहायता समूह तंत्र में ऋण संचलन बढ़ाकर अगले पांच वर्षों में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी को 44.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का वादा किया गया है।

    अन्य प्रस्तावों में कर्मांजलि योजना के तहत प्रत्येक जिले में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास, पुलिस बल में महिला कर्मियों की भर्ती में वृद्धि और ‘रत्तीरेर साथी’ मोबाइल ऐप्लिकेशन के माध्यम से मजबूत सुरक्षा तंत्र शामिल हैं।

    घोषणापत्र में कोलकाता के प्रमुख चौराहों पर महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा संचालित ‘पिंक बूथ’ और प्रमुख सड़कों पर पूरी तरह से महिला रात्रि गश्त दल तैनात करने का भी वादा किया गया है।

    राज्य में मुस्लिम मतदाता लगभग 30 प्रतिशत हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण 24 परगना और उत्तर एवं दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों में केंद्रित यह समुदाय 114 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाता है। तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में इन सीट पर लगभग पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की थी।

    पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद की 22 में से 20 सीट, मालदा की 12 में से आठ सीट और उत्तर दिनाजपुर की छह में से चार सीट जीतीं।

    घोषणापत्र में अल्पसंख्यकों तक पहुंच बनाने के इरादे से कई वादे किए गए हैं जिनमें वक्फ संपत्ति की रक्षा और सामुदायिक कल्याण के लिए उनका उपयोग, आलिया विश्वविद्यालय में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों का विस्तार और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्थित 27 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण शुरू करना शामिल है।

    वक्फ संपत्ति पर ध्यान केंद्रित करना पिछले एक साल से इस मुद्दे के इर्द-गिर्द जारी राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में हो रहा है।

    पिछले साल अप्रैल में मुर्शिदाबाद के समसेरगंज, सूती और धुलियान इलाकों में संशोधित वक्फ कानून के विरोध में प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक झड़पों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी।

    उस समय बनर्जी ने मुस्लिम समुदाय को आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार ‘‘पश्चिम बंगाल में नया अधिनियम लागू नहीं करेगी’’।

    राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा जिलाधिकारियों को छह दिसंबर तक केंद्र के यूएमआईडी पोर्टल पर लगभग 82,000 वक्फ संपत्ति का विवरण अपलोड करने का निर्देश देने के बाद यह विवाद हाल में फिर से चर्चा में आया।

    महिलाओं और अल्पसंख्यकों के साथ-साथ घोषणापत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बीच भी समर्थन जुटाने का प्रयास किया गया है।

    घोषणापत्र में योग्यश्री कोचिंग को मजबूत करके शैक्षिक और आजीविका के अवसरों के विस्तार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए 100 प्रतिशत छात्रवृत्ति कवरेज और प्रत्येक ब्लॉक में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति छात्रावासों के विस्तार का वादा किया गया है।

    इसमें महतो समुदाय और किसान जातियों के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा हासिल करने के प्रयासों को तेज करने के साथ-साथ जनजातीय स्वयं सहायता समूहों का समर्थन करने और वित्तीय समावेशन में सुधार के लिए बड़े क्षेत्र बहुउद्देशीय सहकारी समितियों (एलएएमपी) को मजबूत करने का भी संकल्प लिया गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2026 के विधानसभा चुनाव एक बार फिर इस बात पर निर्भर कर सकते हैं कि ममता बनर्जी इस सामाजिक गठबंधन को एकजुट रखने में सफल होती हैं या नहीं।

    एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, ‘‘अगर ममता बनर्जी महिलाओं के वोट, अल्पसंख्यकों का समर्थन बरकरार रखती हैं और पश्चिमी क्षेत्र में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं के बीच पैठ बनाती हैं तो विपक्ष के लिए तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।’’

    अल्पसंख्यकों आदिवासियों को प्रमुखता मिली तृणमूल के चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं
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