देवानंद सिंह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का 17 से 19 फरवरी तक का भारत दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि दो लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच गहराते विश्वास और साझा दृष्टिकोण का प्रतीक है। मुंबई में जब दोनों नेता मुस्कुराते हुए मिले, तो वह तस्वीरें सिर्फ कैमरों में कैद पल नहीं थीं, बल्कि भारत और फ्रांस के रिश्तों की मजबूती की जीवंत अभिव्यक्ति थीं।
राष्ट्रपति मैक्रों का यह कहना कि “भारत और फ्रांस भरोसे का रिश्ता साझा करते हैं” दरअसल भारत की वैश्विक विश्वसनीयता पर एक बड़ी मुहर है। आज जब विश्व व्यवस्था अनिश्चितताओं से घिरी हुई है, तब दो मजबूत लोकतंत्रों का एक-दूसरे के साथ खड़ा होना वैश्विक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आतंकवाद आज भी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। भारत वर्षों से इसकी मार झेलता आया है, वहीं फ्रांस भी कई आतंकी घटनाओं का शिकार रहा है। ऐसे में दोनों देशों का यह कहना कि “आतंकवाद को जड़ से मिटाना हमारी प्राथमिकता है” केवल बयान नहीं, बल्कि साझा पीड़ा और साझा संकल्प का परिणाम है।
भारत और फ्रांस लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोगी रहे हैं। खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग इस साझेदारी को और मजबूत बनाते हैं। जब दो जिम्मेदार राष्ट्र आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो उसका संदेश वैश्विक स्तर पर जाता है कि लोकतंत्र अपनी सुरक्षा के लिए सजग और सक्षम हैं।
भारत-फ्रांस संबंधों की विशेषता यह है कि इनमें उतार-चढ़ाव की जगह निरंतरता रही है। चाहे परमाणु ऊर्जा सहयोग हो, अंतरिक्ष कार्यक्रम हो या रक्षा समझौते—फ्रांस ने हर अहम मोड़ पर भारत का साथ दिया है।
राष्ट्रपति मैक्रों का यह बयान कि दोनों देशों के बीच भरोसे का रिश्ता है, भारत की बढ़ती वैश्विक साख को रेखांकित करता है। पिछले एक दशक में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत की है। वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने से लेकर बहुपक्षीय मंचों पर निर्णायक भूमिका निभाने तक, भारत ने खुद को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
फ्रांस का भारत के प्रति यह विश्वास इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला देश बन चुका है।
इस दौरे का एक अहम पड़ाव ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ का उद्घाटन है। यह पहल दोनों देशों के बीच तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग को नई दिशा देगी। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है।
मुंबई में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में राष्ट्रपति मैक्रों की भागीदारी यह दर्शाती है कि फ्रांस भारत को केवल बाजार नहीं, बल्कि एक नवाचार भागीदार के रूप में देखता है। भारत की युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल क्रांति ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। फ्रांस की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की नवाचार क्षमता का संगम वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकता है।
कूटनीति केवल दस्तावेजों और समझौतों तक सीमित नहीं होती; उसमें नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और तालमेल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच दिखने वाली सहजता और आत्मीयता इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की खुली और सकारात्मक धारा प्रवाहित हो रही है।
मुंबई में दोनों नेताओं की मुस्कुराती तस्वीरें इस बात का प्रतीक हैं कि यह रिश्ता केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में व्यक्तिगत समीकरण कई बार बड़े निर्णयों को आसान बना देते हैं। भारत और फ्रांस के बीच यह सामंजस्य भविष्य की जटिल चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध होगा।
आज विश्व बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, यूरोप की सुरक्षा चुनौतियाँ और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते समीकरणों के बीच भारत और फ्रांस की साझेदारी एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर रही है।
फ्रांस यूरोपियन यूनियन का प्रभावशाली सदस्य है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य भी। वहीं भारत उभरती आर्थिक और सामरिक शक्ति है, जो वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में दोनों देशों का सहयोग वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत की विदेश नीति आज आत्मविश्वास और संतुलन का परिचय देती है। रूस, अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों के साथ समानांतर और संतुलित संबंध बनाए रखना भारत की कूटनीतिक कुशलता को दर्शाता है। फ्रांस के साथ मजबूत होते संबंध इस संतुलन को और सुदृढ़ करते हैं।
भारत और फ्रांस का रिश्ता अब पारंपरिक मित्रता से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुका है। आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई, रक्षा सहयोग, तकनीकी नवाचार और वैश्विक मंचों पर समन्वय—ये सभी इस संबंध को बहुआयामी बनाते हैं।
राष्ट्रपति मैक्रों का यह कहना कि भारत और फ्रांस भरोसे का रिश्ता साझा करते हैं, केवल एक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण है। मुंबई में दिखी दोस्ती की गर्मजोशी आने वाले वर्षों में और गहराई लेगी, ऐसा विश्वास किया जा सकता है।
आज जब दुनिया अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब भारत और फ्रांस की यह साझेदारी आशा, स्थिरता और सहयोग का संदेश देती है। यह केवल दो देशों की दोस्ती नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा हितों और उज्ज्वल भविष्य की साझी प्रतिबद्धता की कहानी है।

