रायपुर में काय-चिकित्सकों का पाँच दिवसीय कुष्ठ रोग प्रशिक्षण सम्पन्न
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर:क्षेत्रीय कुष्ठ प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (आरएलटीआरआई), लालपुर, रायपुर, छत्तीसगढ़ के सौजन्य से राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 9 से 13 फरवरी तक काय-चिकित्सकों (Physiotherapist) का पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में देशभर से आए प्रतिभागियों को कुष्ठ रोग की नई उपचार पद्धति और दिव्यांगता रोकथाम की अद्यतन जानकारी दी गई।
1 अप्रैल 2025 से लागू नई एमडीटी व्यवस्था
प्रशिक्षकों ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से पूरे देश में संशोधित एमडीटी (Multi Drug Therapy) उपचार पद्धति लागू की गई है। अब चार की जगह केवल दो प्रकार की एमडीटी दवाएं दी जाएंगी—
14 वर्ष से ऊपर के मरीजों को एडल्ट एमडीटी
14 वर्ष से कम आयु के मरीजों को चाइल्ड एमडीटी
प्रशिक्षण में पेशेंट कार्ड, ट्रीटमेंट कार्ड, सेंसरी टेस्टिंग, बीएमटी, डब्ल्यूएचओ ग्रेडिंग डिसेबिलिटी, पीईपी-एसडीआर (सिंगल डोज रिफाम्पिसिन) आदि विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही दिव्यांगता रोकथाम, चिकित्सीय पुनर्वास और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी पर भी विशेष सत्र आयोजित हुए।
दिव्यांगता रोकथाम में काय-चिकित्सकों की अहम भूमिका
जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव ने बताया कि इस प्रशिक्षण में सदर अस्पताल, पूर्वी सिंहभूम से साल्गी मार्डी ने भाग लिया।
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि कुष्ठ रोग में होने वाले रिएक्शन और न्यूराइटिस के प्रबंधन में काय-चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे मरीजों को सेल्फ केयर, व्यायाम और दैनिक गतिविधियों (ADL) के प्रति जागरूक कर दिव्यांगता को रोक सकते हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर समय पर उच्च स्तरीय केंद्रों में रेफरल से बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि काय-चिकित्सकों का लक्ष्य मरीजों को दैनिक जीवन, कार्य एवं मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों में सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।

