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    Home » खनिज बेल्ट में बड़ा विवाद श्री मेटालिक्स पर गोचर भूमि कब्जाने और करोड़ों की रिश्वत का आरोप
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    खनिज बेल्ट में बड़ा विवाद श्री मेटालिक्स पर गोचर भूमि कब्जाने और करोड़ों की रिश्वत का आरोप

    Sponsored By: सोना देवी यूनिवर्सिटीFebruary 6, 2026No Comments3 Mins Read
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    गोचर भूमि
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    खनिज बेल्ट में बड़ा विवाद

    श्री मेटालिक्स पर गोचर भूमि कब्जाने और करोड़ों की रिश्वत का आरोप

    एक दशक पुराना अतिक्रमण, नियमों की अनदेखी का आरोप

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    बड़बिल(ओडिशा):ओडिशा के खनिज-समृद्ध केंदुझर जिले में खनन गतिविधियों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। बड़बिल की प्रमुख औद्योगिक इकाई श्री मेटालिक्स लिमिटेड एवं कंपनी के मालिक उद्योगपति महेश अग्रवाल पर लोइदापड़ा गांव में 13.94 एकड़ सरकारी गोचर (चारागाह) भूमि पर अतिक्रमण का गंभीर आरोप सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इस मामले में राज्य सरकार की निष्क्रियता पर कड़ी टिप्पणी की है, वहीं जिला कलेक्टर ने भी स्थिति पर चिंता जताई है।

    एक दशक पुराना अतिक्रमण, नियमों की अनदेखी का आरोप

    दस्तावेजों के मुताबिक, यह अतिक्रमण एक दशक से अधिक पुराना बताया जा रहा है। आरोप है कि पट्टा शर्तों के तहत गोचर भूमि के बदले समकक्ष भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई, जो नियमों का उल्लंघन है। सीएजी की ऑडिट रिपोर्टों में राज्यभर में ऐसे मामलों का उल्लेख है, जहां ओडिशा भूमि अतिक्रमण रोकथाम (OPLE) अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद कार्रवाई सीमित रही। खनन के लिए चर्चित केंदुझर जिले में प्रवर्तन पर सवाल उठ रहे हैं।

    स्थानीय समुदाय पर असर

    ग्रामीणों का कहना है कि खनन विस्तार से सामुदायिक चारागाह सिमटते जा रहे हैं, जिससे पशुपालन पर निर्भर परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है। पर्यावरणीय क्षरण और संसाधनों की बर्बादी को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं।

    रिश्वत के आरोप, सरकार से मंजूरी का दावा

    इसी बीच, उद्योगपति महेश अग्रवाल और श्री मेटालिक्स पर भूमि विवाद से आगे बढ़कर औद्योगिक परियोजना विस्तार की मंजूरी के बदले रिश्वत देने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि करीब 885 करोड़ की परियोजना के लिए कथित तौर पर 27 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। आरोप है कि इस प्रक्रिया में एक निजी लॉजिस्टिक कारोबारी ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    खनन नियमों के उल्लंघन के सवाल

    निरीक्षण रिपोर्टों में श्री मेटालिक्स की खदानों में खनिज संरक्षण नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने की बात कही जा रही है। पहले भी ओडिशा के खनन क्षेत्र में अवैध निकासी को लेकर शाह आयोग सहित विभिन्न रिपोर्टों में व्यापक अनियमितताओं का उल्लेख हो चुका है। कई कंपनियां जुर्माने और अनुपालन को लेकर कानूनी प्रक्रियाओं में उलझी रही हैं।

    राजनीतिक जिम्मेदारी पर बहस

    केंदुझर के विधायक और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का चुनावी क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंचों से ‘खनन माफिया’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमणों पर ठोस कदम क्यों नहीं उठे—यह बड़ा सवाल है।

    जांच की मांग तेज

    विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। सीबीआइ या किसी विशेष आयोग से जांच कराने की आवाजें भी उठ रही हैं। लोगों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि आरोपों की सच्चाई क्या है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी।
    खनिज संपदा से समृद्ध ओडिशा में यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है क्या कानून अपना काम करेगा या प्रभाव और धन के आगे कमजोर पड़ेगा?

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