नारायण आईटीआई लुपुंगडीह, चांडिल में राष्ट्रनिर्माता पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गईl
सरायकेला चांडिल – नारायण आईटीआई, लुपुंगडीह, चांडिल में भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षकगण, कर्मचारी तथा प्रशिक्षार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित मदन मोहन मालवीय जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर *संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे जी* ने अपने संबोधन में कहा कि “पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने शिक्षा को राष्ट्र सेवा का सशक्त माध्यम बनाया। उनका जीवन सत्य, सेवा और संस्कारों पर आधारित था, जो आज की युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है।”
उन्होंने आगे कहा कि मालवीय जी के आदर्शों को अपनाकर ही सशक्त, शिक्षित और संस्कारवान समाज का निर्माण संभव है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय कार्यों पर प्रकाश डाला।
पंडित मदन मोहन मालवीय भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और समाज सुधारक थे। उनका जन्म 25 दिसंबर 1861 को प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वे भारतीय संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के प्रबल समर्थक थे।
उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना कर देश को एक महान शैक्षणिक संस्थान दिया। वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और कई बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से समाज सुधार का कार्य किया। 12 नवंबर 1946 को उनका निधन हुआ। उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न (2015) से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से मौजूद रहे ट्रस्टी संजय सिंह, इंदु कुमारी, प्राचार्य जयदीप पांडे, प्रकाश महतो, शांति राम महतो,देवाशीष मंडल, शुभम साहू, भगत लाल तेली, पवन महतो, गौरव महतो, निमाई मंडल आदि मौजूद रहे।

