नीमडीह थानेदार के खिलाफ साजिश बेनकाब : झूठे आरोप से मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला, सच्चाई आई सामने
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला। कपाली निवासी फैयाज़ आलम उर्फ़ सोनू द्वारा नीमडीह थाना प्रभारी संतन तिवारी पर लगाए गए मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों की सच्चाई अब सामने आ चुकी है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि फैयाज़ ने झूठी कहानी गढ़कर न केवल थानेदार की छवि धूमिल करने की कोशिश की, बल्कि सोशल मीडिया पर प्रचारित करवाकर मामले को सनसनीखेज रूप देने का प्रयास भी किया।
मामले की शुरुआत 17 अक्टूबर की शाम हुई थी, जब फैयाज़ अपने साथी मोहम्मद अजहरुद्दीन के साथ चांडिल डैम घूमने गया था। इसी दौरान दोनों नीमडीह थाना पहुंचे, जहां अजहरुद्दीन किसी मामले को लेकर थाना प्रभारी से जानकारी लेना चाहता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जानकारी न मिलने पर फैयाज़ ने थाने में अनुचित व्यवहार किया और बाद में बेहोश हो गया। थानेदार ने तत्परता दिखाते हुए उसे प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा और सादे कागज पर उसकी सकुशल घर जाने की लिखित पुष्टि करवाई।
इसके बावजूद, फैयाज़ ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से यह अफवाह फैलाई कि थानेदार ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। बाद में उसने मानवाधिकार आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई। लेकिन जब पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की तहकीकात की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि फैयाज़ उर्फ़ सोनू खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और पत्रकार बताकर कपाली क्षेत्र में गौ-तस्करों की पैरवी करता है। उसके कई ऐसे लोगों से संबंध हैं जो अवैध कारोबार में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि वह नीमडीह थाना उस दिन एक चोरी के मामले में पकड़ी गई गाड़ी की पैरवी करने गया था। जब उसकी बात नहीं बनी, तो उसने थानेदार के खिलाफ साजिश रच डाली।
अब जब पूरा मामला उजागर हो चुका है, तो सवाल यह उठता है कि बार-बार नीमडीह थाना प्रभारी को निशाना बनाने की कोशिश के पीछे कौन-सा गिरोह या समूह सक्रिय है? क्या यह वही नेटवर्क है जो क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को बचाने के लिए पुलिस की साख गिराने का खेल खेल रहा है?
फिलहाल, इस प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि नीमडीह थाना प्रभारी संतन तिवारी पर लगाए गए आरोप निराधार थे और सच्चाई एक बार फिर कानून व्यवस्था की ईमानदारी के पक्ष में खड़ी दिखाई दी है।

