राजनीति में अतीत को दोष देने की परंपरा गहराती जा रही है, जबकि जनता को भविष्य की दिशा चाहिए, बहस नहीं—समाधान चाहिए, आरोप नहीं
अशोक कुमार ठाकुर
बिहार की राजनीति एक बार फिर उस मोड़ पर पहुँच गई है जहाँ चुनावी मुद्दों से ज़्यादा “कौन दोषी है” का प्रश्न प्रमुख हो गया है। विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी के बीच सियासी बयानबाज़ी ने नया रूप ले लिया है।
केंद्र की राजनीति में जिस तरह हर ऐतिहासिक गलती के लिए नेहरू को जिम्मेदार ठहराने की परंपरा चल पड़ी है, उसी तर्ज़ पर बिहार में अब हर पिछड़ेपन, प्रशासनिक नाकामी या सामाजिक विफलता के लिए लालू प्रसाद यादव को दोष देने का नया नैरेटिव तैयार किया जा रहा है।
“जंगलराज”, “भ्रष्टाचार” और “पिछड़ेपन की राजनीति” जैसे पुराने शब्द फिर से दोहराए जा रहे हैं। रैलियों से लेकर सोशल मीडिया तक यही संदेश फैलाया जा रहा है कि राज्य का विकास रुक गया क्योंकि लालू यादव ने शासन किया। यह रणनीति केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि जनभावना को प्रभावित करने की सुनियोजित कोशिश प्रतीत होती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का नैरेटिव दोहरे उद्देश्य पूरे करता है एक ओर यह मतदाताओं के मन में पुराने भय को जगाता है, तो दूसरी ओर मौजूदा शासन की कमियों से ध्यान हटाने में मदद करता है।
मगर लोकतांत्रिक राजनीति का उद्देश्य केवल अतीत को कोसना नहीं, बल्कि वर्तमान को सुधारना और भविष्य के लिए मार्ग बनाना होना चाहिए।
यह सही है कि हर नेता और शासनकाल की अपनी गलतियाँ होती हैं, परंतु केवल दोषारोपण के सहारे राजनीति करना किसी राज्य को आगे नहीं ले जा सकता। बिहार की समस्याएँ — बेरोज़गारी, शिक्षा में गिरावट, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और पलायन — आज भी उतनी ही गंभीर हैं जितनी पहले थीं। इन पर ठोस नीतिगत विमर्श होना चाहिए, न कि पुरानी गलतियों का अनंत दोहराव।
चुनाव की ‘थिपुर’ (तेज़ी और उबाल) में इस तरह का नकारात्मक नैरेटिव सेट करना न तो उचित है और न ही राज्य के लोकतांत्रिक विवेक के अनुकूल।
लोकतंत्र की असली ताकत मतदाता की समझ में निहित होती है, और जब जनता असल मुद्दों पर सवाल उठाती है, तभी राजनीति जवाबदेह बनती है।
बिहार को अतीत के दोषारोपण से नहीं, भविष्य के संकल्प से दिशा मिलेगी।
जरूरत है ऐसी राजनीति की जो “कौन दोषी” से आगे बढ़कर “कौन समाधान देगा” का उत्तर खोजे। यही सच्चा लोकतांत्रिक रास्ता है — और यही बिहार की अगली पीढ़ी का अधिकार भी।

