गेढ़िया अंचल के प्रावि राधावल्लभपुर के हेडमास्टर मंगलमय भद्र की प्रेरणादायक कहानी
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
जामताड़ा: जिला के गेढ़िया अंचल स्थित प्राथमिक विद्यालय राधावल्लभपुर में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत मंगलमय भद्र एक असाधारण व्यक्तित्व के धनी हैं। जन्म से ही उनकी एक आंख में रोशनी नहीं है, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वे मानते हैं कि शारीरिक बाधाएं सिर्फ शरीर तक सीमित होती हैं, आत्मा और जज़्बे को नहीं रोक सकतीं।
वे बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। उन्होंने पठन-पाठन को खेल, गीत, कहानियों और चित्रों के माध्यम से रोचक बना दिया।
उनकी क्लासरूम में बच्चों की मुस्कान, जिज्ञासा और आत्मविश्वास साफ झलकता है। मंगलमय खुद कहते हैं, “मेरी एक आंख नहीं है, पर मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चों की आंखों से कभी सपनों की रोशनी न बुझे।” आपको बता दूं मंगलमय भद्र विद्यालय को अकेले ही संभालता है।
अभिभावकों का भरोसा अब विद्यालय पर पूरी तरह से कायम हो गया है।
मंगलमय भद्र की कहानी एक सच्चे कर्मयोगी की कहानी है, जो यह दिखाती है कि एक शिक्षक के जज़्बे और समर्पण से किसी भी विद्यालय की तस्वीर बदली जा सकती है। वे अंधेरे में भी आशा की रोशनी बनकर बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।

