Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को राहत, मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण घोटाले में सीबीआई जांच की मांग हुई खारिज!
    Breaking News Headlines

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को राहत, मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण घोटाले में सीबीआई जांच की मांग हुई खारिज!

    News DeskBy News DeskFebruary 8, 2025No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

     

     

    कर्नाटक के मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बड़ी राहत दी है और इस मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांगवाली याचिका खारिज कर दी है.
    खबरों की मानें तो…. यह मामला मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण से संबंधित है, जिसमें मुख्यमंत्री सिद्धरामैया पर अवैध रूप से अपनी पत्नी को साइट आवंटित कराने का आरोप है.

     

    आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें यह मांग की गई थी कि- मुख्यमंत्री सिद्धरामैया की पत्नी पार्वती बी.एम. को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण से 14 साइटों के आवंटन की जांच सीबीआई को सौंपी जाए.
    खबरों पर भरोसा करें तो…. इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि- यह आवंटन नियमों का उल्लंघन कर किया गया था, लिहाजा यह सरकारी जमीन के दुरुपयोग का मामला बनता है.
    अलबत्ता, हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद सीएम सिद्धरमैया को थोड़ी राहत मिली है, हालांकि इस मामले की जांच आगे भी लोकायुक्त ही करेंगे.
    उल्लेखनीय है कि…. इस मामले में पहले ही जस्टिस एम. नागप्रसन्ना सुनवाई पूरी कर चुके थे, जिस पर अब फैसला सुनाते हुए उन्होंने कहा कि- रिकॉर्ड में लाए गए दस्तावेजों से ऐसी बिल्कुल भी नहीं लगता कि लोकायुक्त की ओर से की जा रही जांच में कोई लापरवाही की जा रही है, जांच में किसी भी तरह के पक्षपात, इसके एकतरफा, गलत दिशा में जाने के भी साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए इस मामले को सीबीआई को सौंपने की जरूरत नहीं है, लिहाजा याचिका खारिज की जाती है!

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleयूपी की नई आबकारी नीति, एक तीर से कई निशाने
    Next Article दिल्ली में बनेगी भाजपा सरकार, 46 सीटों पर बनाई बढ़त; आप को लगा बड़ा झटका

    Related Posts

    आसनबनी में जाताल पूजा: अच्छी फसल और समृद्धि की कामना

    June 23, 2026

    14 सूत्री मांगों को लेकर गैलेक्सी एक्सपोर्ट्स के गेट पर ग्रामीणों का हंगामा

    June 22, 2026

    मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 का आगाज, 30 जून से घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ

    June 22, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    आसनबनी में जाताल पूजा: अच्छी फसल और समृद्धि की कामना

    14 सूत्री मांगों को लेकर गैलेक्सी एक्सपोर्ट्स के गेट पर ग्रामीणों का हंगामा

    मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 का आगाज, 30 जून से घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ

    गोविंदपुर में भीषण सड़क हादसा: हाइवा की टक्कर से बाइक सवार की मौत, एक गंभीर घायल

    पानी की समस्या: चैनत में आंदोलन, जातिवाद की चुनौती

    NEET UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा: 30+ गिरफ्तार, बड़ा खुलासा

    भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: निष्पक्ष जांच की मांग तेज

    काले ने “काया ग्रीन्स” का किया उद्घाटन, ताज़ी सब्ज़ियों और स्वस्थ जीवनशैली को मिलेगा नया आयाम

    एकल व्याख्यान: भारतीय ज्ञान मीमांसा के विविध आयाम

    अंबरनाथ पुलिस मानवीय चेहरा: NEET छात्रा का भविष्य संवारा

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.