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    Home » बिहार के बालिका गृह कांड से प्रेरित फिल्म- भक्षक
    Headlines सिनेमा

    बिहार के बालिका गृह कांड से प्रेरित फिल्म- भक्षक

    Devanand SinghBy Devanand SinghFebruary 16, 2024No Comments2 Mins Read
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    नाम: भक्षक
    कलाकार : भूमि पेडणेकर, संजय मिश्रा, आदित्य श्रीवास्तव
    निर्देशक : पुलकित, ज्योत्सना नाथ, पुलकित
    निर्माता : शाह रुख खान
    प्लेटफॉर्म : नेटफ्लिक्स

     

     

    भाषा : हिंदी
    हिंदी सिनेमा वास्तविक कहानियों से प्रभावित रहा है। कई बार वास्तविक घटनाओं से प्रेरणा लेकर शहर और पात्रों के नामों में बदलाव करके उन कहानियों को फिल्म की कहानी में पिरो दिया जाता है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई अभिनेता शाह रुख खान की प्रोडक्शन कंपनी की फिल्म भक्षक भी बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से प्रेरित है, जिसमें यौन उत्पीड़न और मारपीट की शिकार हुई 35 लड़कियों को बचाया गया था।

    कहानी- इस फिल्म की कहानी बिहार के मुन्नवरपुर से शुरू होती है, जहां के एक बालिका गृह में लड़कियां यौन शोषण का शिकार हैं। इस बालिका गृह का कर्ताधर्ता बंसी साहू (आदित्य श्रीवास्तव) है, जो खुद पत्रकार भी है। पुलिस, प्रशासन हर कोई इस बालिका गृह में होने वाली दरिंदगी के आगे अपनी आंखें बंद करके बैठा है।

     

    स्थानीय पत्रकार वैशाली सिंह (भूमि पेडणेकर) अपना न्यूज चैनल कोशिश न्यूज सेट करने का प्रयास कर रही है। इस बीच वैशाली का सूत्र उसे राज्य के चाइल्ड सेंटर होम में हुए सर्वे की ऑडिट रिपोर्ट देता है, जिसमें मुनव्वरपुर के बालिका गृह में बच्चियों के साथ हुए शारीरिक दुर्व्यवहार का जिक्र होता है। वैशाली अपनी रिसर्च शुरू करती है। इसमें उसका साथ कैमरामैन भास्कर सिन्हा (संजय मिश्रा) देता है। क्या वैशाली बच्चियों को वहां से निकाल पाएगी? क्या सत्ता में बैठे लोगों से वह अपने शब्दों की ताकत से लड़ पाएगी, कहानी इस पर आगे बढ़ती है।

    पुलकित निर्देशित इस फिल्म की खास बात यह है कि उन्होंने मुद्दे की संवेदनशीलता को समझते हुए इसे कमर्शियल बनाने वाले कोई तत्व जैसे शोरशराबे वाले बैकग्राउंड स्कोर या फास्ट कट वाले सीन नहीं डाले हैं। फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद पुलकित और ज्योत्सना नाथ ने लिखी है। उन्होंने असल मुद्दों तक पहुंचने में समय व्यर्थ नहीं किया है। ‘भक्षक’ एक इनवेस्‍ट‍िगेटिव-क्राइम थ्रिलर है, लेकिन इसमें ना तो रोमांच है और ना ही खोजबीन। इस कारण यह फिल्म थकाऊ और थोड़ी बोरिंग बन जाती है।

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