इस बार होलिका दहन 9 मार्च को है, जिसमें दहन का मुहूर्त विशेष योग में बताया जा रहा है. इस दिन पूजा के बाद होलिका जलाई जाती है. होलिका दहन का समय भी मायने रखता है और इसे शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए.
9 मार्च को होलिका दहन होगा. इसका शुभ मुहूर्त शाम को 6:22 से लेकर 8:49 मिनट तक रहेगा. 9 मार्च को सोमवार व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र होने से इस दौरान ध्वज योग रहेगा, जो यश-कीर्ति व विजय प्रदान करने वाला होता है.
होलिका दहन शुभ फल देने वाला रहेगा
सोमवार को पूर्णिमा तिथि होने से चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा रहेगा. इसके साथ ही स्वराशि स्थित बृहस्पति की दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी. जिससे गजकेसरी योग का प्रभाव रहेगा. तिथि-नक्षत्र और ग्रहों की विशेष स्थिति में होलिका दहन पर बीमारियों से छुटकारा मिलेगा और शत्रुओं का नाश होगा.शाम को प्रदोषकाल में होलिका दहन के समय भद्राकाल नहीं होने से होलिका दहन शुभ फल देने वाला रहेगा.
पूजा सामिग्री
होलिका दहन के दौरान उसमें आहुति भी दी जाती है. इसके लिए आप इन चीजों को जरूर रखें – नारियल, भुट्टे, कच्चे आम, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का थोड़ा सा हिस्सा. इस सामग्री में उड़द, गेहूं, मसूर, चना, चावल या जौ भी रखे जा सकते हैं.
तीन मार्च से होलाष्टक जारी है
2020 का होलाष्टक दोष 03 मार्च मंगलवार से प्रारंभ हो चुका है. जो नौ मार्च होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाएगा. सभी शुभ कार्य वर्जित हैं. नौ मार्च को गोधूलि बेला में होली दहन होगा. 10 मार्च को ही होली खेली जाएगी. होलाष्टक के पहले दिन अर्थात फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है. इस वजह से इन आठों दिन में मानव मस्तिष्क तमाम विकारों, शंकाओं और दुविधाओं आदि से घिरा रहता है, जिसकी वजह से शुरू किए गए कार्य के बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है.