लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
लातेहार, पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के रीजनल कमांडर और 20 लाख के इनामी रविन्द्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू उर्फ सुरेन्द्र गंझू को लातेहार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उस पर झारखंड सरकार ने 15 लाख और NIA ने 5 लाख का इनाम घोषित कर रखा था।
ऑपरेशन ‘SPECIALOPS- KANTI’ का विवरण
पुलिस अधीक्षक लातेहार को गुप्त सूचना मिली थी कि रविन्द्र गंझू अपने दस्ते के साथ बेतर ओपी क्षेत्र के हेसला बांझी टोला, रंगुनिया और कुडू इलाके में घूम रहा है। इसके बाद 12 जुलाई 2026 को लातेहार पुलिस, CRPF और कोबरा 209 के सुरक्षा बलों ने संयुक्त विशेष छापामारी अभियान ‘SPECIALOPS- KANTI’ चलाया। बांझी टोला के बाहर जंगल से उसे गिरफ्तार किया गया।
रविन्द्र गंझू का प्रोफाइल और आपराधिक इतिहास
रविन्द्र गंझू
उम्र: 43 वर्ष, पिता रामब्रत गंझू
पता: हेसला बांझी टोला, थाना बेतर ओपी, चन्दवा, जिला लातेहार
आपराधिक इतिहास: करीब 30 साल से संगठन में सक्रिय। चन्दवा, गुमला और लोहरदगा इलाके में सक्रिय था। उस पर लातेहार में 40, लोहरदगा में 87 और गुमला में 27, कुल 154 मामले दर्ज हैं।
प्रमुख घटनाएं: 2011 में कोने स्कूल हमला, 2012 में घाघू ब्लास्ट, 2013 में कटिया जंगल में 11 जवानों की शहादत, 2019 में लुकईया मोड़ पर PCR वैन पर हमला, 2021 में रेलवे ट्रैक उड़ाने सहित कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा।
गिरफ्तारी के दौरान बरामद हथियारों का जखीरा
- एक AK 56 राइफल
- AK 56 की 2 मैगजीन और 180 जिंदा कारतूस
- एक 7.65 mm ऑटोमेटिक पिस्टल
- पिस्टल की 2 मैगजीन और 12 जिंदा कारतूस
- एक देशी सिंगल बैरल राइफल
- 5.56 mm के 21 जिंदा कारतूस
- .303 के 16 जिंदा कारतूस
- एक काले रंग का पाउच
पुलिस अधीक्षक का बयान
पुलिस के अनुसार रविन्द्र गंझू लेवी वसूलना, विकास कार्यों में बाधा डालना और जनता व सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं में शामिल रहा है। उसकी गिरफ्तारी से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है।
– कुमार गौरव, पुलिस अधीक्षक लातेहार
माओवादी संगठन पर प्रभाव और आगे की रणनीति
रविन्द्र गंझू की गिरफ्तारी झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। बीते तीन दशकों से वह भाकपा माओवादी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहा है और चन्दवा, गुमला, लोहरदगा के घने जंगलों में संगठन की सैन्य शाखा का संचालन करता था। पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन्स) ने बताया कि इस गिरफ्तारी से संगठन की फंडिंग नेटवर्क और भर्ती प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AK-56 जैसे अत्याधुनिक हथियार की बरामदगी दर्शाती है कि नक्सलियों के पास अभी भी घातक मारक क्षमता मौजूद है। हालांकि, CRPF, कोबरा बटालियन और राज्य पुलिस के संयुक्त अभियान ‘SPECIALOPS- KANTI’ ने खुफिया तंत्र की मजबूती को साबित किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा घोषित 5 लाख का इनाम यह इंगित करता है कि उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले भी लंबित हैं।
आने वाले दिनों में पुलिस उसके सहयोगियों और लेवी नेटवर्क पर शिकंजा कसेगी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी उससे पूछताछ कर बड़े खुलासे कर सकती है। इस सफलता से ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जगी है।

