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    Home » बारीडीह बस्ती में “बाबा नाम केवलम” अखंड कीर्तन संपन्न
    Breaking News झारखंड

    बारीडीह बस्ती में “बाबा नाम केवलम” अखंड कीर्तन संपन्न

    Nizam KhanBy Nizam KhanJanuary 14, 2023No Comments2 Mins Read
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    बारीडीह बस्ती में “बाबा नाम केवलम” अखंड कीर्तन संपन्न

    कीर्तन करने से शरीर ,आत्मा और मन तीनों पवित्र होता है

    “हरि ” का कीर्तन और किसी का नहीं अपनी प्रशंसा नहीं दूसरे की प्रशंसा नहीं

    आनंद मार्ग एवं पूर्णिमा नेत्रालय के सहयोग 5 मोतियाबिंद रोगियों का ऑपरेशन कर निशुल्क लेंस लगाया गया

    _________________________

    जमशेदपुर 14 जनवरी 2023

    आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से 3 घंटे का “बाबा नाम केवलम” अखंड कीर्तन बारीडीह बस्ती नागा डूंगरी में संपन्न हुआ
    एवं गदड़ा आनंद मार्ग जागृति से चयनित 5 रोगियों का पूर्णिमा नेत्रालय में निशुल्क ऑपरेशन कर लेंस लगाया गया चश्मा एवं दवा देकर सकुशल घर पहुंचा दिया गया
    कीर्तन समाप्ति के बाद आचार्य पारसनाथ ने कहा कि कीर्तन “हरि “का कीर्तन और किसी का नहीं अपनी प्रशंसा नहीं दूसरे की प्रशंसा नहीं बहुत से लोग अपनी बड़ाई खूब अधिक से अधिक करते हैं मैंने यह किया मैंने वह किया इत्यादि यह हुआ आत्म कीर्तन यह जो”हरि “हैं अर्थात परम पुरुष हैं इन्हीं का कीर्तन करना है अपना कीर्तन नहीं कीर्तनिया सदा “हरि ” मनुष्य यदि मुंह से स्पष्ट भाषा में उच्चारण कर कीर्तन करता है उससे उसका मुख पवित्र होता है जीहां पवित्र होती है कान पवित्र होते हैं शरीर पवित्र होता है और इन सब के पवित्र होने के फलस्वरूप आत्मा भी पवित्र होती है कीर्तन के फल स्वरुप मनुष्य इतना पवित्र हो जाता है कि वह अनुभव करता है जैसे उसने कभी अभी-अभी गंगा स्नान किया हो भक्तों के लिए गंगा स्नान का अर्थ हुआ सदा कीर्तन यदि लोग मिल जुलकर कीर्तन करते हैं तब उन लोगों की मात्र शारीरिक शक्ति ही एकत्रित होती है ऐसी बात नहीं है उनकी मिलित मानस शक्ति भी एक ही भावधारा में एक ही परम पुरुष से प्रेरणा प्राप्त कर एक ही धारा में एक ही गति में बहती रहती है इसलिए मिलित जड़ शक्ति और मिलित मानसिक शक्ति इस पंचभौतिक जगत का दुख कलेश दूर करती है.

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