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    Home » इंडियन एयरफोर्स ने फ्रांसीसी एयरफोर्स का जताया आभार, हवा में ऐसे भरा गया ईंधन
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    इंडियन एयरफोर्स ने फ्रांसीसी एयरफोर्स का जताया आभार, हवा में ऐसे भरा गया ईंधन

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 29, 2020No Comments5 Mins Read
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    नई दिल्ली: फ्रांस से भारत के लिए पांच राफेल लड़ाकू विमानों का पहला जत्था सोमवार को रवाना हो गया था जो कल यानी बुधवार को यहां पहुंचेगा. फ्रांस के शहर बोर्डेऑस्क में मैरीग्नेक वायुसेना अड्डे से रवाना हुए ये विमान लगभग सात हजार किलोमीटर का सफर तय करके अंबाला वायुसेना एयरबेस पर पहुंचेंगे. बता दें कि भारत ने वायुसेना के लिए फ्रांस के साथ चार साल पहले 36 राफेल विमान खरीदने के लिए 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था.चीन से तनाव के बीच फ्रांस से लड़ाकू विमान राफेल भारत पहुंच रहे हैं. सोमवार को पांच राफेल विमान फ्रांस से रवाना हुए और सात घंटे की यात्रा के बाद यूएई के एयरबेस पर पहुंचे. ये विमान बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंचेंगे. सफर के दौरान हवा में ही इन विमानों में ईंधन भरा गया. भारतीय वायु सेना ने इसे लेकर फ्रांसीसी वायु सेना का खास तौर पर आभार जताया है.पांच राफेल विमानों के इस जत्थे में तीन एक सीट वाले और दो विमान दो सीटों वाले हैं. विमानों में उड़ान के दौरान हवा में ही ईंधन भरा गया. इस काम में फ्रांसीसी वायु सेना के टैंकर की मदद ली गई. इससे पहले सोमवार को फ्रांस से उड़ान भरने के सात घंटे बाद ये विमान तय कार्यक्रम के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल दाफरा हवाई अड्डे पर उतरे थे. अगर मौसम सही रहा तो ये विमान बुधवार को अंबाला पहुंच जाएंगे.वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमान के शामिल होने से उसकी युद्ध क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी. राफेल विमानों के भारत आने का समय भी अहम है. ये विमान भारत को ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब पूर्वी लद्दाख में सीमा मामले पर चीन के साथ गतिरोध चल रहा है. माना जा रहा है कि एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर तनाव को देखते हुए इन्हें चीन सीमा पर तैनात किया जा सकता है, जहां वायुसेना संचालन क्षमताएं और मजबूत करना चाहती है.

    पहले बेड़े को दिया जाएगा यह नाम

    वायुसेना ने इन लड़ाकू विमानों के पहले बेड़े को खास नाम देने जा रही है. इन विमानों के बेड़े को वायुसेना की 17वीं स्क्वाड्रन के तौर पर जाना जाएगा. राफेल विमान के स्क्वाड्रन का नाम ‘गोल्डन एरो’ होगा. इन विमानों का निर्माण करने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसाल्ट ने अभी 10 राफेल विमान दिए हैं. इनमें से पांच फ्रांस में ही हैं, जिन पर भारतीय वायुसेना के पायलट प्रशिक्षण ले रहे हैं. सभी 36 विमानों की डिलीवरी 2021 के अंत तक हो जाएगी.

    पायलटों को दिया गया है खास प्रशिक्षण

    राफेल विमानों को उड़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के पायलटों को खास प्रशिक्षण दिया गया है. साल 2018 में इस विशेष प्रशिक्षण के लिए एक फाइटर पायलट, एक इंजीनियर और चार तकनीकी विशेषज्ञों को पहले ग्रुप में चुना गया था. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्तमान में भी चल रहा है. इसके लिए अभी पांच राफेल विमानों को फ्रांस में ही रखा गया है. वायुसेना के 12 लड़ाकू पायलटों ने फ्रांस में राफेल लड़ाकू जेट पर अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है.

    रखरखाव की तैयारियां भी पूरी

    वायुसेना ने राफेल विमान के रखरखाव की भी तैयारियों को भी अंतिम रूप दे दिया है. इसके लिए वायुसेना ने बुनियादी ढांचा विकसित कर लिया है. अंबाला एयरबेस पर शेल्टर, हैंगर और अन्य सुविधाओं समेत बुनियादी ढांचे को विकसित किया गया है. फ्रांसीसी विशेषज्ञों की देखरेख में इन्हें तैयार किया गया है. यहां एडवांस हैंगर के साथ एक अत्याधुनिक वेपन स्टोरेज बनाया है. जहां राफेल के हथियारों और मिसाइलों को सहेज कर रखा जाएगा.

    राफेल विमानों की ये हैं खासियतें

    राफेल का रडार बाकी विमानों के मुकाबले बेहद मजबूत है और 100 किलोमीटर के दायरे में 40 टारगेट निर्धारित कर सकता है. खतरनाक और आधुनिक मिसाइलों से लैस राफेल 300 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को निशाना बना सकता है. राफेल में लो लैंड जैमर, 10 घंटे तक की डाटा रिकॉर्डिंग और इस्रायली हेलमेट वाली डिस्प्ले की सुविधा भी है. राफेल कई खूबियों वाले रडार वॉर्निंग रिसीवर, इन्फ्रारेड सर्च और ट्रैकिंग सिस्टम जैसी क्षमताओं से भी लैस है.

    शक्तिशाली हथियार ले जाने में सक्षम

    शक्तिशाली हथियारों को ले जाने में सक्षम राफेल के हथियार पैकेज में यूरोपीय मिसाइल निर्माता एमबीडीएस की मिटोर, स्कैल्प क्रूज मिसाइल, मीका हथियार प्रणाली शामिल है. सूत्रों का कहना है कि वायुसेना की नजर अब मध्यम दूरी के हवा से जमीन पर लक्ष्य भेदने वाली मॉड्यूलर हथियार प्रणाली हैमर की खरीद पर टिकी है. वह सशस्त्र बलों को अहम हथियारों की खरीद के लिए सरकार की ओर से दी गई आपात वित्तीय शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है.

    बता दें कि हैमर फ्रांसीसी रक्षा कंपनी साफरान द्वारा विकसित की गई बिल्कुल सटीक निशाना साधने वाली मिसाइल है. इसे फ्रांस की वायुसेना और नौसेना के लिए विकसित किया गया था. चीन के साथ सीमा गतिरोध के मद्देनजर रक्षा मंत्रालय ने इस महीने सेना के तीनों अंगों को आपात अभियान संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए 300 करोड़ रुपये के अलग-अलग पूंजीगत खरीद कार्यक्रम की विशेष शक्तियां प्रदान की हैं

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